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उद्योग आएं, लालफीताशाही हटे तो चमके अपना कोटा

उद्योग जगत | गुजरात-दुबई की तरह हाे फैसले

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विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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उद्योग आएं, लालफीताशाही हटे तो चमके अपना कोटा
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मेरा कोटा से जुड़ाव 1962 से है। मैंने इस शहर को देश का 'कानपुर' बनते देखा है। जब एक साथ 18 बड़े उद्योग जेके, डीसीएम, ओरिएंटल पावर केबल और आईएल जैसी फैक्ट्रियों से कोटा गुलजार था। लेकिन, श्रमिक समस्याओं, बदलती तकनीक और सरकारी नीतियों के कारण वह स्वर्णिम दौर सिमट गया। आज हमारे हाड़ौती में लगभग 2500 एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जो 25,000 से 30,000 लोगों को सीधा रोजगार दे रही हैं। लेकिन, हमारा दुर्भाग्य रहा कि हम कोटा स्टोन, कोटा डोरिया, दाल-तेल मिलों और सीमेंट जैसे पारंपरिक उद्योगों में ही फंसे रह गए। जब तक हम बड़े उद्योगों को नहीं लाएंगे, तब तक एमएसएमई सेक्टर का विकास मुमकिन नहीं है; दोनों का चोली-दामन का साथ है। केंद्र और राज्य की योजनाएं कागजों पर बहुत अच्छी हैं, लेकिन वे धरातल पर इसलिए नहीं उतरतीं क्योंकि यहाँ जमीन आवंटन की प्रक्रिया बेहद जटिल है। कन्वर्जन और एक्विजिशन की नीतियों में कोई न कोई दिक्कत रहती है। 'राइजिंग राजस्थान' में करोड़ों के निवेश के बावजूद हम जमीन तक नहीं दे पाते। हमारे अधिकारियों में उद्योगों के प्रति लगाव न के बराबर है। हमें गुजरात और दुबई की तरह त्वरित फैसले लेने की कार्यशैली अपनानी होगी, जहाँ व्यापारियों की समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाता है। गुजरात ने तो उद्योगों के विकास के लिए आईएएस की जगह 'आईटीएस' के अधिकारियों को तैनात किया है।

लिथियम बैटरी प्लांट लाए राजस्थान सरकार

अब यहां एयरपोर्ट बनने जा रहा है, जिससे कोटा में एयरोसिटी, आईटी सिटी और शंभूपुरा में हमारे मौजूदा औद्योगिक क्षेत्र से 3 गुना बड़ा नया इंडस्ट्रियल एरिया विकसित होगा। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर कोटा के पास 4 एग्जिट-एंट्री पॉइंट्स हैं, जहाँ ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब विकसित कर उद्योगों का जाल बिछाया जा सकता है। भविष्य सेमीकंडक्टर और लिथियम-बेस्ड बैटरियों का है। कोटा में 4,000 से 5,000 करोड़ का सेमीकंडक्टर प्लांट और ईवी सेक्टर के लिए लिथियम बैटरी प्लांट लाने के लिए सरकार को तुरंत प्रयास करने चाहिए। यदि हम कोटा में 'रेडिएशन प्लांट' स्थापित कर लें, तो बिना किसी प्रिजर्वेटिव के हमारा कृषि उत्पाद विदेशों में निर्यात के लिए फिट हो जाएगा। यदि हम यह कर लें, तो कोटा 2030 तक औद्योगिक मानचित्र पर ऊंचे पायदान पर खड़ा होगा।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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