कोटा। कोटा संभाग के सबसे बड़े महाराव भीम सिंह (एमबीएस) अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बदहाल नजर आ रही हैं। अस्पताल में मरीजों को इंजेक्शन लगाने के लिए सिरिंज तक उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सा कर्मियों के साथ-साथ मरीज और उनके परिजन बेहद परेशान हैं।
2 महीने से इमरजेंसी दवाओं का संकट
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सा कर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले दो महीनों से कई आवश्यक इमरजेंसी दवाइयां अस्पताल में नहीं आ रही हैं। दवाओं की अनुपलब्धता के कारण मरीजों के परिजनों को दवा के बदले 'NOC' (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) बनाकर थमाया जा रहा है, जिससे उन्हें बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
दावों और हकीकत में भारी अंतर
राजस्थान सरकार अस्पतालों में सभी दवाएं निःशुल्क और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने का दावा करती है, लेकिन एमबीएस अस्पताल की जमीनी हकीकत इसके उलट है।
संभागभर के मरीजों का होता है भरोसा
एमबीएस अस्पताल कोटा संभाग का सबसे प्रमुख चिकित्सा केंद्र है, जहां कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ के अलावा पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसके बावजूद अस्पताल में बुनियादी मेडिकल सामग्री और दवाओं की भारी किल्लत मरीजों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ साबित हो रही है।
