राजस्थान में नगर निगम और नगर पालिकाओं के मेयर के पदों के लिए लॉटरी निकालने की कवायद जयपुर में शुरू हो गई है। इस लॉटरी सिस्टम में कोटा में एक ही नगर निगम होने के बाद मेयर पद महिला ओबीसी के लिए आरक्षित हो गया है। इसके साथ ही अगर नगर पालिकाओं की बात करें तो कोटा के सुल्तानपुर नगर पालिका में एससी ओपन और सुकेत नगर पालिका के लिए ओबीसी ओपन के लिए रिजर्व हो गई है। वही पिछले नगर निगम के चुनाव में कोटा में दो बोर्ड बनाए गए थे। लेकिन परिसीमन के बाद अब फिर से नगर निगम नए स्वरूप में चुनावी मैदान में है।
पिछले नगर निगम के चुनाव की बात की जाए तो साल 2025 के दिसंबर माह में पिछला बोर्ड का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे में कोटा उत्तर में 70 वार्ड और कोटा दक्षिण में 80 वार्डो पर चुनाव हुए थे। इन दोनों जगह पर कांग्रेस का बोर्ड बना था। लेकिन परिसीमन होने के बाद अब दोनों को मर्ज कर दिया गया है और 100 वार्ड ही रखे गए हैं। इसके बाद अब उम्मीदवारों के लिए चुनौती काफी कड़ी हो गई है। ऐसे में कोटा नगर निगम के 100 वार्डों के लिए 721 मतदान केंद्र होंगे। व
हीं जिले की पांच नगर पालिकाओं रामगंजमंडी, सुकेत, सांगोद, इटावा, सुल्तानपुर में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित 160 वार्ड पार्षद चुने जाएंगे। कोटा नगर निगम और नगर पालिका में इस बार होने वाले चुनाव में वोटर्स की संख्या अगर देखी जाए तो कोटा नगर निगम में 8,24,491 वोटर्स है। जिनमें 4 लाख से अधिक पुरुष और महिलाएं शामिल है। दूसरी तरफ नगर पालिका रामगंजमंडी में 29,321 वोटर्स, सांगोद में 23,066, सुल्तानपुर में 20,065 इटावा में 19,599 और सुकेत में 17,427 वोटर्स शामिल है।
बीजेपी के लिए कोटा उत्तर बन सकती है बड़ी चुनौती
दरअसल, विधानसभा चुनाव पूरे होने के बाद भाजपा में एक समय दिग्गज रहे पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। जानकारों की माने तो कोटा उत्तर के कई वार्ड में शुरू से ही कांग्रेस का दबदबा रहा है। अगर कोई निर्दलीय चुनाव जीता भी है तो वह भी बाद में कांग्रेस में ही शामिल हुआ है। ऐसा कम देखने को मिला है कि निर्दलीय पार्षद बीजेपी में शामिल हुआ हो। ऐसे में भाजपा के लिए कोटा उत्तर के वार्ड को जितना किसी चुनौती से काम नहीं होगा। क्योंकि एक तरफ पूर्व मंत्री शांति धारीवाल कोटा उत्तर से आते हैं तो दूसरी तरफ प्रहलाद गुंजल ने भी कांग्रेस में अपनी पकड़ को मजबूत कर लिया है।
