राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने री-नीट यूजी 2026 का परिणाम घोषित करने के साथ ही श्रेणीवार क्वालिफाइंग कटऑफ भी जारी कर दी है। इस वर्ष सामान्य (जनरल-ईडब्ल्यूएस) वर्ग के लिए क्वालिफाइंग कटऑफ 715 से 213 अंक निर्धारित की गई है, जो अब तक की सबसे अधिक कटऑफ में शामिल है। एक्पट्र्स का मानना है कि इस बार परीक्षा का स्तर चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद अभ्यर्थियों का प्रदर्शन अत्यंत उत्कृष्ट रहा, जिसके कारण क्वालिफाइंग सीमा में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। परिणाम घोषित होने के साथ ही अब देशभर के लाखों अभ्यर्थियों की निगाहें एमबीबीएस एवं बीडीएस प्रवेश के लिए शुरू होने वाली काउंसलिंग प्रक्रिया पर टिक गई हैं। अब परिणाम जारी होने के बाद देशभर के 11.21 लाख क्वालिफाइड अभ्यर्थियों की नजर ऑल इंडिया 15 प्रतिशत कोटा तथा राज्य स्तरीय एमबीबीएस और बीडीएस काउंसलिंग पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष बढ़ी हुई कटऑफ और सीमित सरकारी सीटों के कारण शीर्ष मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा पहले की तुलना में और अधिक कड़ी रहने वाली है।
री-नीट 2026 के परिणामों का विश्लेषण कई रोचक तथ्य भी सामने लाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार लगभग 10.04 लाख अभ्यर्थी 213 अंक तक भी नहीं पहुंच सके, जबकि 700 से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या केवल 19 रही। 650 से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 1,492 रही। 600 से अधिक अंक अर्जित करने वाले 10,160 अभ्यर्थी रहे, जबकि 500 से अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 90,780 दर्ज की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि उच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या सीमित रही, लेकिन बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए क्वालिफाइंग सीमा को काफी ऊपर पहुंचा दिया।
कटऑफ विश्लेषण : तोड़े पुराने रिकॉर्ड, बढ़ी क्वालिफाइंग सीमा
यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सामान्य वर्ग की कटऑफ में इस बार अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है। वर्ष 2025 में सामान्य वर्ग की कटऑफ 686-144, वर्ष 2024 में 720-162, वर्ष 2023 में 720-137 तथा वर्ष 2022 में 715-117 अंक थी। इसी प्रकार ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग की कटऑफ वर्ष 2025 में 143-113, वर्ष 2024 में 161-127, वर्ष 2023 में 136-107 तथा वर्ष 2022 में 116-93 अंक रही थी। दिव्यांग श्रेणी में भी पिछले वर्षों की तुलना में इस बार कटऑफ काफी ऊपर पहुंची है, जो प्रतियोगिता के बढ़ते स्तर को दर्शाती है।
एनटीए द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार सामान्य एवं ईडब्ल्यूएस वर्ग के अभ्यर्थियों को पात्रता प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 50वां पर्सेंटाइल हासिल करना आवश्यक है, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 40 पर्सेंटाइल निर्धारित किया गया है। दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी उनकी संबंधित श्रेणी के अनुसार अलग-अलग पर्सेंटाइल तय किए गए हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि पर्सेंटाइल हर वर्ष समान रहता है, जबकि कटऑफ अंक परीक्षा की कठिनाई, प्रश्नपत्र के स्तर तथा अभ्यर्थियों के समग्र प्रदर्शन के आधार पर बदलते रहते हैं।
इस वर्ष सामान्य एवं ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए कटऑफ 715 से 213 अंक रही। ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के लिए क्वालिफाइंग अंक 212 से 177 निर्धारित किए गए हैं। सामान्य-ईडब्ल्यूएस दिव्यांग वर्ग के लिए कटऑफ 212 से 194 अंक रखी गई है, जबकि ओबीसी एवं एससी दिव्यांग वर्ग के लिए 193 से 177 तथा एसटी दिव्यांग वर्ग के लिए 191 से 178 अंक निर्धारित किए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि सभी वर्गों में पिछले वर्षों की तुलना में क्वालिफाइंग सीमा में बढ़ोतरी हुई है।
आर्यन गुप्ता एआईआर-1
आर्यन गुप्ता ने 720 में से 715 अंक प्राप्त कर अखिल भारतीय रैंक (एआईआर)-1 हासिल की है। टॉप-100 अभ्यर्थी आगामी काउंसलिंग से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के पात्र होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल क्वालिफाइंग कटऑफ ही प्रवेश की गारंटी नहीं होती। सरकारी कॉलेजों में वास्तविक प्रवेश के लिए आवश्यक ओपनिंग एवं क्लोजिंग रैंक का निर्धारण काउंसलिंग के दौरान सीट आवंटन के बाद ही स्पष्ट होगा। नीट परिणाम के साथ ही नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय एमबीबीएस सीट मैट्रिक्स भी जारी कर दी है। देश के 19 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में सरकारी एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाई गई है, लेकिन राजस्थान को इस बार भी कोई अतिरिक्त सरकारी एमबीबीएस सीट नहीं मिली है।
सरकारी मेडिकल काॅलेजों की सीटें
राज्यों की तुलना करें तो सरकारी मेडिकल संस्थानों की संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जहां 49 सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। हालांकि सरकारी एमबीबीएस सीटों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र शीर्ष पर है, जहां 42 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लगभग 6,000 सीटें उपलब्ध हैं। तमिलनाडु 37 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और 5,349 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि तेलंगाना में 36 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 4,400 सीटें हैं। राजस्थान 33 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और 4,480 सीटों के साथ प्रमुख राज्यों में शामिल है, लेकिन इस वर्ष सीटों में कोई वृद्धि नहीं होने से राज्य के विद्यार्थियों को सीमित अवसरों के बीच प्रतिस्पर्धा करनी होगी।
ओएमआर और रिजल्ट्स में शिकायतें
एनटीए ने नीट-यूजी 2026 की ओएमआर शीट तथा परिणामों से संबंधित शिकायतों को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। एजेंसी ने बताया है कि प्राप्त शिकायतों की गहन जांच की जा रही है और ओएमआर शीट्स की वैधता का भी परीक्षण किया जा रहा है।
