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हाड़ौती अंचल

सीएचसी सुल्तानपुर बना रेफरल सेंटर, डिलीवरी 40% घटी

4 विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली, 30 में से 10 पद रिक्त, मरीज हो रहे परेशन

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सीएचसी सुल्तानपुर बना रेफरल सेंटर, डिलीवरी 40% घटी
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दीगोद उपखंड के सबसे बड़े राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सुल्तानपुर रेफरल सेंटर बना हुआ है। अस्पताल में करोड़ों के सोनोग्राफी मशीन, ऑपरेशन थिएटर और अन्य आधुनिक उपकरण होने के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण गंभीर मरीजों को रेफर किया जा रहा है। अस्पताल में सर्जन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ और निश्चेतक सहित प्रमुख विशेषज्ञों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। विशेषज्ञों के अभाव का असर प्रसव सेवाओं पर भी पड़ा है। 2 वर्ष पहले जहां हर माह 70-80 प्रसव होते थे, अब यह संख्या घटकर 40-50 रह गई है। 30 स्वीकृत पदों में से 10 खाली हैं। सीनियर नर्सिंग ऑफिसर, लैब टेक्नीशियन, वार्ड बॉय, कनिष्ठ सहायक और स्वीपर के पद भी रिक्त होने से व्यवस्थाएं प्रभावित हैं। नर्सिंग स्टाफ की कमी बाहरी कर्मचारियों से पूरी की जा रही है। विशेषज्ञ सेवाएं नहीं मिलने से कई मरीज निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।

सोनोग्राफी एक दिन, एक्स-रे साफ नहीं

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर 28 जनवरी 2022 को अस्पताल को सोनोग्राफी मशीन मिली, लेकिन लंबे समय तक शुरू नहीं हो सकी। वर्तमान में भी सप्ताह में केवल एक दिन गुरुवार को ही सोनोग्राफी हो रही है। इतने बड़े क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं के लिए यह सुविधा नाकाफी साबित हो रही है। दूसरी ओर करीब 20 वर्ष पुरानी एक्स-रे मशीन अब जवाब दे चुकी है। स्पष्ट एक्स-रे नहीं आने के कारण मरीजों को मजबूरन निजी लैब में महंगी जांच करानी पड़ रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्ष 2016 से मेडिकल कॉलेज के अधीन होने के बावजूद अस्पताल को आज तक नियमित विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं मिल सके। करीब 40 वर्ष पुराने इस 30 बेड अस्पताल को 50 बेड, मॉडल सीएचसी या उप जिला अस्पताल बनाने की मांग भी वर्षों से लंबित है। अस्पताल प्रबंधन समिति (एमआरएस) की बैठकें नियमित नहीं हो रही हैं। जानकारी के अनुसार 29 अगस्त 2025 के बाद से अब तक बैठक आयोजित नहीं हुई, जिससे विकास और व्यवस्थाओं से जुड़े कई निर्णय अटके हुए हैं। 

रात में डॉक्टर ऑन-कॉल रहते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और निजी अस्पताल खुलने से प्रसव की संख्या घटी है। सोनोग्राफी सप्ताह में दो-तीन दिन कराने और नई एक्स-रे मशीन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। बजट मिलते ही एमआरएस की बैठक भी आयोजित की जाएगी। - डॉ. श्याम मालव, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी

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नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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