मैं कोटा के बदलते स्वरूप का गवाह हूँ... एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में जब भी कोटा की सड़कों पर निकलता हूँ, तो मुझे कोटा में भविष्य के भारत का गतिशील और महत्वाकांक्षी चेहरा दिखता है। कोटा आज पारंपरिक सीमाओं से निकलकर शहरीकरण की नई मिसाल पेश कर रहा है। पिछले 6 महीनों में मैंने महसूस किया है कि यहां कोचिंग के साथ-साथ एग्रो-बेस्ड इंडस्ट्रीज, भारी उद्योगों और पर्यटन का एक अभूतपूर्व दौर शुरू हुआ है। कनेक्टिविटी का महाजाल बिछ रहा है, जिससे विकास की नई इबारत लिखी जा रही है।
दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के केंद्र में होने और बेहतरीन रेल-रोड नेटवर्क के कारण यहाँ लॉजिस्टिक्स और बिजनेस मूवमेंट तेजी से बढ़ा है। कोटा देश के 'फास्ट मूविंग सिटीज' में शुमार होगा। हमारी कृषि पैदावार बढ़ रही है। बड़े पैमाने पर वेयरहाउस स्थापित हो रहे हैं और नए इंडस्ट्रियल एरिया डेवलप किए जा रहे हैं, जिनमें देश के बड़े औद्योगिक घरानों ने भारी निवेश की रुचि दिखाई है।
अब कोटा सिर्फ 'शिक्षा नगरी' या उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि वाइल्डलाइफ और चंबल सफारी जैसे नए आयामों के साथ यहां टूरिज्म का बड़ा बूम आ रहा है। कोटा खुद को एक आधुनिक 'अर्बन हब' के रूप में री-डिफाइन करते हुए वर्ष 2030 के स्वर्णिम भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है। उद्योग, कौशल और पर्यटन का यह 'रेयर कॉम्बिनेशन' कोटा को देश के सबसे समृद्ध शहरों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करेगा।
परफेक्ट वीकेंड गेटवे बना, टूरिस्ट फुटफॉल में उछाल
पारंपरिक रूप से राजस्थान में पर्यटन का मतलब जोधपुर, उदयपुर या जैसलमेर जैसी हेरिटेज सिटीज रहा है। लेकिन कोटा अब इस परिभाषा को बदल रहा है। आज का युवा क्राउड वाइल्डलाइफ टूरिज्म और 'वीकेंड गेटवे' को पसंद करता है। वे ऐसे शहरों को एक्सप्लोर करना चाहते हैं जहाँ बेहतरीन अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ प्राकृतिक स्थल भी हों। कोटा इस पैमाने पर बिल्कुल फिट बैठता है। हमारी आइकॉनिक 'चंबल सफारी' में पिछले एक साल में पर्यटकों ने जबरदस्त रुचि दिखाई है, जिससे टूरिस्ट फुटफॉल में भारी बढ़ोतरी हुई है।
कोटा के कोचिंग हब का ग्राफ चढ़ रहा ऊपर
बीच में कुछ समय के लिए ऐसा माहौल बना कि कोटा का कोचिंग हब का ग्राफ नीचे जा रहा है, लेकिन इस सीजन के आंकड़े इस धारणा को पूरी तरह खारिज करते हैं। इस साल छात्रों ने भारी संख्या में इंक्वायरी की है। हमारा एजुकेशनल इकोसिस्टम बेहद मजबूत और स्थिर है। इस साल भी आईआईटी के टॉपर कोटा से ही रहे हैं। उतार-चढ़ाव जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन कोटा की साख आज भी अडिग है। मैं देश भर के छात्रों से कहना चाहूंगा कि वे एक पॉजिटिव माइंडसेट के साथ कोटा आएं, शहर आपका स्वागत करने के लिए तैयार है।
ट्रैफिक सिग्नल फ्री सिटी में दौड़ेगी 100 ई-बस
कोटा को देश का पहला 'ट्रैफिक सिग्नल फ्री सिटी' होने का गौरव हासिल है।
इसी तर्ज पर अब हम शहर में एक बेहद मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम लागू करने जा रहे हैं। बहुत जल्द कोटा की सड़कों पर 100 पीएम ई-बस दौड़ती नजर आएंगी। नई परिवहन व्यवस्था के संचालन से स्थानीय स्तर पर ड्राइवरों, कंडक्टरों और मेंटेनेंस स्टाफ सहित सैकड़ों युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। इसके लिए हमारा डिपो पूरी तरह तैयार है। इन इलेक्ट्रिक बसों के आने से डीजल-पेट्रोल पर निर्भरता कम होगी, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी। यह माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ईंधन की खपत को कम करने और पर्यावरण संरक्षण के विजन को समर्पित हमारी एक बड़ी सौगात है।
