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दुग्ध सहकारिता को जन-आंदोलन बनाने वाले दूरदर्शी नेता - कोटा-बूंदी सरस डेयरी के चेयरमैन चैन सिंह राठौड़

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दुग्ध सहकारिता को जन-आंदोलन बनाने वाले दूरदर्शी नेता - कोटा-बूंदी सरस डेयरी के चेयरमैन चैन सिंह राठौड़
दुग्ध सहकारिता को जन-आंदोलन बनाने वाले दूरदर्शी नेता - कोटा-बूंदी सरस डेयरी के चेयरमैन चैन सिंह राठौड़
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राजस्थान की धरती सदैव से ऐसे व्यक्तित्वों को जन्म देती रही है, जिन्होंने समाज, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का कार्य किया। हाड़ौती अंचल में यदि दुग्ध सहकारिता आंदोलन की बात की जाए तो आज एक नाम विशेष रूप से चर्चा में है चैन सिंह राठौड़। कोटा-बूंदी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ यानी सरस डेयरी के चेयरमैन के रूप में उन्होंने जिस प्रकार किसानों, पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों के हितों को प्राथमिकता दी है, वह उन्हें एक जनप्रिय और दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करता है।

चैन सिंह राठौड़ केवल एक पदाधिकारी नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नब्ज को समझने वाले ऐसे व्यक्तित्व के धनी हैं जिन्होंने सहकारिता को जनआंदोलन का रूप देने का प्रयास किया। उनका मानना है कि यदि गांव मजबूत होंगे तो देश मजबूत होगा, और गांवों की मजबूती का सबसे बड़ा आधार किसान तथा पशुपालक हैं। यही कारण है कि उन्होंने सरस डेयरी को केवल दूध उत्पादन तक सीमित न रखकर किसानों की आर्थिक उन्नति का माध्यम बनाया।

हाड़ौती क्षेत्र में हजारों किसान परिवार आज डेयरी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। इन परिवारों की आय में वृद्धि हो, उन्हें दूध का उचित मूल्य मिले और आधुनिक तकनीकों का लाभ प्राप्त हो-इन उद्देश्यों को लेकर चैन सिंह राठौड़ ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनके नेतृत्व में कोटा-बूंदी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ ने गांव-गांव तक अपनी पहुंच मजबूत की। आज यह संघ हजारों दुग्ध उत्पादकों को प्रत्यक्ष रूप से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान कर रहा है।

वर्ष 2023 में जब उन्हें कोटा जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ का चेयरमैन चुना गया, तब उन्होंने स्पष्ट कहा था कि उनका लक्ष्य दुग्ध उत्पादकों और पशुपालकों के हितों की रक्षा करना है तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण दूध उपलब्ध कराना है। चुनाव में उनकी जीत केवल एक राजनीतिक सफलता नहीं थी, बल्कि यह किसानों और सहकारी समितियों के विश्वास की जीत थी।

चैन सिंह राठौड़ का कार्यकाल कई उपलब्धियों के लिए जाना जाता है। उनके नेतृत्व में डेयरी ने आर्थिक रूप से उल्लेखनीय प्रगति की। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, संघ ने वर्ष 2024-25 में एक करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जबकि इससे पहले लाभ काफी कम था। यह परिवर्तन केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि बेहतर प्रबंधन, पारदर्शिता और योजनाबद्ध कार्यशैली का परिणाम था।

उन्होंने डेयरी को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में भी कई कदम उठाए। दूध संग्रहण प्रणाली को मजबूत करना, ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध समितियों का विस्तार, पशुपालकों को समय पर भुगतान और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराना-ये सभी कार्य उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहे। उनके प्रयासों से आज कोटा-बूंदी क्षेत्र के हजारों गांवों से प्रतिदिन लाखों लीटर दूध संग्रहित किया जा रहा है।

चैन सिंह राठौड़ की सोच केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है, बल्कि वे भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार करते हैं। उन्होंने डेयरी क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और नए उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। सरस जलजैसे नए उत्पाद की अवधारणा इसी दूरदर्शी सोच का उदाहरण है। उन्होंने घोषणा की कि कोटा क्षेत्र के लोगों को जल्द ही शुद्ध पेयजल सरस जलब्रांड के  माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। यह पहल दर्शाती है कि वे डेयरी को बहुआयामी विकास की दिशा में आगे बढ़ाना चाहते हैं।

ग्रामीण विकास और सहकारिता के प्रति उनका दृष्टिकोण अत्यंत सकारात्मक है। सहकार सप्ताह के दौरान आयोजित कार्यक्रमों में उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि सहकारी संस्थाएं केवल आर्थिक इकाइयां नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम हैं। उनका मानना है कि सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को रोजगार, महिलाओं को आत्मनिर्भरता और किसानों को स्थायी आय प्रदान की जा सकती है।

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी चैन सिंह राठौड़ की सोच प्रगतिशील रही है। उन्होंने महिला दुग्ध उत्पादक समितियों के गठन और उनकी भागीदारी बढ़ाने पर विशेष बल दिया। बोर्ड बैठकों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा महिला समितियों को प्रोत्साहन देने के निर्णय उनके सामाजिक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे किसानों और पशुपालकों से सीधे संवाद स्थापित करते हैं। गांवों में जाकर उनकी समस्याएं सुनना, दूध संग्रहण केंद्रों की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करना और अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश देना-ये सभी बातें उन्हें एक सक्रिय और संवेदनशील नेतृत्वकर्ता बनाती हैं। किसानों का कहना है कि चैन सिंह राठौड़ ने डेयरी प्रशासन और ग्रामीण दुग्ध समितियों के बीच विश्वास का मजबूत पुल तैयार किया है।

डेयरी क्षेत्र में पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने कई योजनाओं का समर्थन किया। पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता, टीकाकरण अभियान, पशु चिकित्सा सेवाएं और आधुनिक दुग्ध उत्पादन तकनीकों को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर उन्होंने विशेष ध्यान दिया। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत चारा बीज वितरण जैसी योजनाओं से हजारों पशुपालकों को लाभ मिला।

चैन सिंह राठौड़ का मानना है कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को कृषि के समान महत्व देना होगा। इसी सोच के साथ उन्होंने डेयरी प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने, नए प्लांट स्थापित करने और आधुनिक डेयरी अवसंरचना विकसित करने की मांग उठाई। उन्होंने कोटा-बूंदी क्षेत्र में बड़े स्तर पर आधुनिक दूध संयंत्र स्थापित करने की पहल भी की। सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है। उन्होंने बार-बार इस बात को दोहराया कि निजी कंपनियों की तुलना में सहकारी संस्थाएं किसानों के हितों की बेहतर रक्षा कर सकती हैं। उनका उद्देश्य सहकारिता मॉडल को इतना मजबूत बनाना है कि किसान आत्मनिर्भर बन सकें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिल सके। उनकी लोकप्रियता का एक कारण उनका सरल और सहज व्यक्तित्व भी है। वे आम लोगों से जुड़कर काम करने में विश्वास रखते हैं। प्रशासनिक बैठकों से लेकर ग्रामीण सभाओं तक, हर मंच पर उनका व्यवहार सौम्य और सकारात्मक दिखाई देता है। यही कारण है कि दुग्ध उत्पादकों के बीच वे केवल चेयरमैन नहीं, बल्कि अपने प्रतिनिधि और हितैषी के रूप में पहचाने जाते हैं। कोटा सरस डेयरी ने उनके नेतृत्व में गुणवत्ता और विश्वास की नई पहचान बनाई है। दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आधुनिक जांच प्रणाली, शीतकरण व्यवस्था और पारदर्शी भुगतान प्रणाली को सुदृढ़ किया गया। इसका सीधा लाभ दुग्ध उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों को मिला।

आज जब ग्रामीण भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, तब चैन सिंह राठौड़ जैसे नेतृत्वकर्ता प्रेरणा का स्रोत बनकर सामने आते हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि यदि नेतृत्व ईमानदार, दूरदर्शी और जनहितकारी हो तो सहकारिता आंदोलन गांवों की तस्वीर बदल सकता है। हाड़ौती क्षेत्र में डेयरी विकास की नई कहानी लिखने वाले चैन सिंह राठौड़ का सफर संघर्ष, सेवा और समर्पण का प्रतीक है। वे किसानों की उम्मीदों, पशुपालकों के विश्वास और सहकारिता की शक्ति के सशक्त प्रतिनिधि बन चुके हैं। आने वाले समय में उनसे और भी बड़े कार्यों की अपेक्षा की जा रही है। निस्संदेह, चैन सिंह राठौड़ आज केवल कोटा सरस डेयरी के चेयरमैन नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, सहकारिता और किसान हितों के एक मजबूत चेहरे के रूप में उभर चुके हैं। उनका नेतृत्व हाड़ौती क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं और विकास की नई दिशा का प्रतीक बन गया है।

 

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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