डॉ विमला डूंकवाल कुलगुरु,कृषि विवि
नागरिक अभिव्यक्ति. कोटा
कृषि विश्वविद्यालय कोटा ने अनुसंधान को सीधे खेत की मिट्टी और यहां की जलवायु से जोड़ा है। विभिन्न फसलों की 122 उत्पादन तकनीकें विकसित की हैं, जो सीधे तौर पर किसानों का उत्पादन बढ़ाने, खरपतवार नियंत्रण, कीट और रोग प्रबंधन में सहायक हैं। अनियमित वर्षा, सूखा और बढ़ता तापमान आज की कड़वी सच्चाई है। हम सप्ताह में दो बार मोबाइल, रेडियो और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 3,40,000 किसानों को सीधे मौसम पूर्वानुमान और कृषि सलाह भेज रहे हैं, जिससे किसान फसलों के संबंध में सही निर्णय ले पा रहे हैं। हमारे वैज्ञानिकों ने सोयाबीन, चना, उड़द, मसूर और अलसी जैसी फसलों की 36 उन्नत किस्में विकसित की हैं। ये किस्में अधिक पैदावार देने वाली, कम अवधि में पकने वाली और रोग व कीट प्रतिरोधी हैं। पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा हमारे द्वारा विकसित की गई जलवायु-अनुकूल किस्म 'Kota Masoor 6 (RKL 20&26D)' को देश को समर्पित की थी। हमने सोयाबीन, आंवला, मसाला, मिलेट, फल व सब्जी प्रसंस्करण पर विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए हैं। इस पहल के जरिए हमने अब तक 135 सफल उद्यमी तैयार किए हैं, जो अपना स्वयं का रोजगार कर रहे हैं और 2.50 लाख से लेकर 15.00 लाख तक की वार्षिक आमदनी अर्जित कर रहे हैं। आगामी 5 वर्षों में हमारा लक्ष्य राजस्थान की कृषि को अधिक टिकाऊ, लाभकारी, तकनीक-आधारित एवं जलवायु-अनुकूल बनाना है।
