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आनंद महिंद्रा बोले—पहली नजर में लगा एआई की तस्वीर है, फिर पता चला सचमुच बना है

1450 करोड़ के चंबल रिवर फ्रंट को देश-दुनिया तक पहुंचाने की जरूरत; फुटफॉल और खर्च पर सरकार-कांग्रेस आमने-सामने

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आनंद महिंद्रा बोले—पहली नजर में लगा एआई की तस्वीर है, फिर पता चला सचमुच बना है
आनंद महिंद्रा बोले—पहली नजर में लगा एआई की तस्वीर है, फिर पता चला सचमुच बना है
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नागरिक अभिव्यक्ति । कोटा

उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने कोटा के हेरिटेज चंबल रिवर फ्रंट की तस्वीर देखकर इसे पहले एआई से बनी तस्वीर समझ लिया। लेकिन जब उन्होंने इसके बारे में आगे जानकारी ली तो पता चला कि यह वास्तविक है। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर चंबल रिवर फ्रंट की जमकर तारीफ की और सवाल उठाया कि इतनी खूबसूरत जगह के बारे में अभी तक ज्यादा लोगों को जानकारी क्यों नहीं है।

महिंद्रा ने लिखा कि यह उनकी वंडर लिस्ट में शामिल हो गया है और वे इसे देखना चाहते हैं। उन्होंने लोगों से यह भी पूछा कि तस्वीरों में जितना खूबसूरत रिवर फ्रंट नजर आता है, क्या वास्तव में भी उतना ही खूबसूरत है। उन्होंने इसके निर्माण से जुड़े तत्कालीन यूडीएच मंत्री एवं कोटा उत्तर विधायक शांति धारीवाल, कोटा विकास प्राधिकरण और आर्किटेक्ट अनूप बरतारिया का उल्लेख करते हुए इसके निर्माण का श्रेय दिया।

महिंद्रा ने कोटा की पहचान कोचिंग सिटी के रूप में होने का जिक्र करते हुए कहा कि देश में कोटा का नाम आते ही अक्सर विद्यार्थियों के दबाव और आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं की चर्चा होती है, जबकि चंबल रिवर फ्रंट जैसी जगह के बारे में बहुत कम जानकारी है। करीब 6 किलोमीटर के दोनों किनारों पर विकसित रिवर फ्रंट में 27 घाट, 100 से अधिक मॉन्यूमेंट्स, फाउंटेन और विभिन्न क्षेत्रों की स्थापत्य एवं सांस्कृतिक झलकियां मौजूद हैं।

हालांकि रिवर फ्रंट की खूबसूरती के साथ इसका खर्च और पर्यटकों की संख्या भी लगातार बहस का विषय है। यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा इसे कई बार सफेद हाथी बता चुके हैं। उनका कहना है कि व्यवस्थाएं बनाए रखने पर केडीए को करीब 2 करोड़ रुपए प्रतिमाह खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि पर्यटकों से होने वाली आय अपेक्षाकृत कम है।

इसके उलट कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल का आरोप है कि भाजपा सरकार आने के बाद रिवर फ्रंट के प्रचार-प्रसार पर ध्यान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रचार का बजट रखा गया था, लेकिन उसका अपेक्षित उपयोग नहीं हुआ। उनका तर्क है कि पर्याप्त प्रचार होता तो फुटफॉल की तस्वीर अलग होती।

रिवर फ्रंट के प्रचार को लेकर पर्यटन क्षेत्र भी सक्रिय है। जनवरी 2026 में आयोजित हाड़ौती ट्रेवल मार्ट में देशभर से आए टूर ऑपरेटरों के सामने इसका प्रचार किया गया। होटल फेडरेशन के राजस्थान कोटा संभाग अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी के अनुसार रिवर फ्रंट को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने की जरूरत है और ट्रेवल मार्ट के बाद कोटा में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

करीब 1450 करोड़ रुपए की लागत से विकसित रिवर फ्रंट का उद्घाटन सितंबर 2023 में हुआ था। यहां राजस्थान के मारवाड़, मेवाड़, ढूंढाड़, बांगड़, बृज, हाड़ौती, किशनगढ़, शेखावाटी और गोदवार की संस्कृति को स्थापत्य के माध्यम से दर्शाया गया है। चंबल माता की 62 मीटर ऊंची संगमरमर की प्रतिमा, विश्व का सबसे बड़ा नंदी और रात में रोशनी से जगमगाता रिवर फ्रंट इसके प्रमुख आकर्षण हैं।

हालांकि होटल और टेंट सिटी जैसी प्रस्तावित परियोजनाएं अब तक आकार नहीं ले सकी हैं। ऐसे में आनंद महिंद्रा की टिप्पणी ने रिवर फ्रंट की पुरानी बहस को फिर सामने ला दिया है—क्या समस्या आकर्षण की कमी है या उसके प्रचार की?

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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