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महापौर का लोकसभा अध्यक्ष को धोक देना अनुचित नहीं: राजनीति में निष्ठा और वरिष्ठता का सम्मान सर्वोपरि

ट्रोलिंग के बीच महापौर अनुसुया गोस्वामी के समर्थन में उठे स्वर; संवैधानिक पद की गरिमा और संगठनात्मक अनुशासन की मिसाल बताया गया

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महापौर का लोकसभा अध्यक्ष को धोक देना अनुचित नहीं: राजनीति में निष्ठा और वरिष्ठता का सम्मान सर्वोपरि
महापौर का लोकसभा अध्यक्ष को धोक देना अनुचित नहीं: राजनीति में निष्ठा और वरिष्ठता का सम्मान सर्वोपरि
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नागरिक अभिव्यक्ति @ कोटा

​कोटा नगर निगम की नवनिर्वाचित महापौर श्रीमती अनुसुया गोस्वामी द्वारा देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्था के प्रमुख यानी माननीय लोकसभा अध्यक्ष के कोटा स्थित आवास पर जाकर आशीर्वाद लेने और 'धोक' देने की घटना को लेकर जारी सोशल मीडिया ट्रोलिंग और विपक्षी बयानबाजी पर अब पलटवार शुरू हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम को महापौर की व्यक्तिगत आस्था, भारतीय संस्कृति, संगठनात्मक अनुशासन और अपने वरिष्ठ नेता के प्रति वफादारी का प्रतीक माना जा रहा है।

आस्था और व्यक्तिगत निष्ठा का विषय

​राजनीतिक हलकों में यह बात स्पष्ट रूप से रेखांकित की जा रही है कि महापौर पद तक पहुंचने की इस बड़ी उपलब्धि में बिरला परिवार का मार्गदर्शन और आशीर्वाद निर्णायक रहा है। कोटा ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के राजनीतिक परिदृश्य में यह जगजाहिर है कि कोटा-बूंदी क्षेत्र में संगठनात्मक तालमेल और नेतृत्व के प्रति निष्ठा ही किसी कार्यकर्ता की पहचान बनती है।

​लॉटरी प्रक्रिया के दिन से ही यह लगभग तय माना जा रहा था कि अनुसुया गोस्वामी ही कोटा के महापौर पद का दायित्व संभालेंगी। ऐसे में पदभार संभालने के उपरांत अपने नेता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और घर के बाहर धोक देकर आशीर्वाद लेना पूरी तरह से नैतिक और गरिमापूर्ण आचरण है। यह इस बात का प्रमाण है कि वे अपने नेता और संगठन के प्रति पूरी ईमानदारी से वफादार और समर्पित रहेंगी।

​संवैधानिक गरिमा और बड़ों का आशीर्वाद

​विरोधी दलों द्वारा इस घटना पर उठाए जा रहे सवालों को दरकिनार करते हुए समर्थकों ने स्पष्ट किया कि इससे महापौर पद की गरिमा को कोई ठेस नहीं पहुंची है। एक स्थानीय निकाय (नगर निगम) की प्रमुख द्वारा देश की सर्वोच्च विधायी संस्था के अध्यक्ष का सम्मान करना किसी भी दृष्टिकोण से अनुचित नहीं कहा जा सकता।

​माननीय लोकसभा अध्यक्ष न केवल एक बहुत बड़े संवैधानिक पद पर आसीन हैं, बल्कि वे क्षेत्र के सर्वमान्य वरिष्ठ नेता भी हैं। भारतीय परंपरा में अपने से बड़ों और संरक्षकों का आशीर्वाद लेने की समृद्ध परिपाटी रही है। इसे पद के अपमान के रूप में देखना केवल संकीर्ण राजनीतिक सोच का परिणाम है।

​अनुशासित संगठन और विरोधियों को जवाब

​इस घटनाक्रम के माध्यम से भाजपा के संगठनात्मक अनुशासन और कार्यकर्ताओं की निष्ठा को भी रेखांकित किया गया है। भाजपा नेताओं का अपने नेतृत्व और पार्टी के प्रति समर्पित होना ही उन्हें अन्य राजनीतिक दलों की अवसरवादी और अनुशासनहीन राजनीति से अलग बनाता है।

​कोटा का बैकुंठ धाम (बिरला निवास) क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए सदैव से मार्गदर्शन का केंद्र रहा है, जहां से जनसेवा और राजनीति को दिशा मिलती है। वहां जाकर अपनी निष्ठा और सम्मान प्रदर्शित करने पर ट्रोल करना पूरी तरह तर्कहीन है।

​राजनीति में अवसरवाद के दौर में वफादारी और कृतज्ञता सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। महापौर अनुसुया गोस्वामी ने अपने आचरण से यह सिद्ध कर दिया है कि वे संस्कारों और संगठनात्मक मर्यादाओं को सर्वोपरि मानती हैं। विपक्ष और आलोचकों को इसमें राजनीति तलाशने के बजाय वरिष्ठों के प्रति सम्मान की इस परंपरा को सकारात्मक रूप में देखना चाहिए।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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