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राष्ट्रहित सर्वोपरि, भ्रामक कंटेंट फैलाने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगाम जरूरी: अरविन्द सिसोदिया

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राष्ट्रहित सर्वोपरि, भ्रामक कंटेंट फैलाने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगाम जरूरी: अरविन्द सिसोदिया
राष्ट्रहित सर्वोपरि, भ्रामक कंटेंट फैलाने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगाम जरूरी: अरविन्द सिसोदिया
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कोटा। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन न्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता और देश की अखंडता सर्वोपरि हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भ्रामक सूचनाओं, संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किए गए फोटो-वीडियो और एकतरफा नैरेटिव के प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार से सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने और भारतीय कानूनों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की।

सिसोदिया ने कहा कि डिजिटल युग में सूचनाओं का प्रसार तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही गलत सूचनाओं के जरिए सामाजिक तनाव और आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियां भी पैदा हुई हैं। उनके अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के कंटेंट-रैंकिंग और रिकमेंडेशन एल्गोरिदम की समीक्षा तथा उनकी जवाबदेही तय करना आवश्यक है, ताकि तकनीक का इस्तेमाल भ्रामक विमर्श फैलाने के लिए नहीं हो।

अभिव्यक्ति की आजादी के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी

सिसोदिया ने कहा कि भारत का संविधान नागरिकों को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन इस स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है। राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और देश की अखंडता को ध्यान में रखते हुए कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में झूठ फैलाने या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

उन्होंने आरोप लगाया कि वैश्विक टेक कंपनियों के एल्गोरिदम कई बार व्यावसायिक लाभ के लिए सनसनीखेज सामग्री को अधिक प्रसारित करते हैं। संवेदनशील घटनाओं और विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुरानी, असंबंधित या संपादित तस्वीरों और वीडियो को गलत संदर्भ में प्रस्तुत करना गंभीर समस्या है। ऐसे मामलों में सामग्री की सत्यता, तारीख, स्थान और वास्तविक संदर्भ की पुष्टि सुनिश्चित की जानी चाहिए।

भारतीय कानूनों के दायरे में काम करें कंपनियां

सिसोदिया ने कहा कि मेटा जैसी वैश्विक कंपनियों को भारत के कानूनों और सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के अनुरूप काम करना चाहिए। सोशल मीडिया सेवाओं पर प्रसारित सामग्री की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भ्रामक विजुअल्स के साथ सही तारीख, प्रामाणिक स्थान और वास्तविक संदर्भ जोड़ने संबंधी निर्देश डिजिटल माध्यमों पर विश्वसनीयता बढ़ाने में उपयोगी हो सकते हैं।

स्वदेशी डिजिटल संसाधनों को बढ़ावा देने की पैरवी

सिसोदिया ने एलन मस्क और वैश्विक सोशल मीडिया कंपनियों के संदर्भ में कहा कि भारत को किसी भी प्रकार के दबाव के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने स्वदेशी डिजिटल संसाधनों और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि चीन और रूस जैसे देश भी अपनी तकनीकी क्षमताओं के आधार पर वैश्विक स्तर पर प्रभाव रखते हैं, इसलिए भारत को भी अपने डिजिटल संसाधनों के विकास पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि डिजिटल स्पेस में सत्य और पारदर्शिता स्थापित करना सेवा प्रदाताओं का नैतिक दायित्व है।

नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उन्हें किस तरह की सामग्री दिखाई जा रही है और वह कितनी विश्वसनीय है। सिसोदिया ने केंद्र सरकार से भ्रामक सामग्री पर नियंत्रण संबंधी नियमों को प्रभावी ढंग से लागू कराने और राष्ट्रहित में आवश्यक कदम उठाने की मांग की।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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