मैंने साल 2015 में जब मंडी के अध्यक्ष पद की कमान संभाली, तो पूरा सिस्टम लेबर और मुनीमों ने कब्जे में ले रखा था। किसान खुद को ठगा महसूस करता था। पिछले वर्षों में हमारे कड़े फैसलों का ही नतीजा है कि जो मंडी पहले रोजाना 50 से 70 हजार बोरी बेचती थी, वह आज 2.5 लाख से 3 लाख बोरी प्रतिदिन की आवक के आंकड़े को छू रही है। अब मेरा लक्ष्य इसके वर्तमान 8,000 करोड़ के सालाना टर्नओवर को बढ़ाकर 50 हजार करोड़ का वैश्विक हब बनाने का है।
इसके लिए सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक कांटे लागाए, जिससे तुलाई क्षमता 4 गुना बढ़ गई। मंडी में गेट नंबर 2 खुलवाने से एंट्री-एग्जिट का पूरा मैनेजमेंट बदल गया। राजस्थान में सिर्फ यह ऐसी मंडी है, जहां एफसीआई में तूलने वाले माल की आड़त भी व्यापारियों को मिलती है। साल 2017 में हमारे प्रयासों से लहसुन को 'सब्जी' के साथ-साथ 'मसाले' की श्रेणी में शामिल किया गया। आज मंडी में रोजाना 40 हजार कट्टे लहसुन की आवक है और यह 25 हजार प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। अब प्याज को भी मसाले में शामिल कराने का प्रयास कर रहे हैं। भविष्य में मंडी विस्तार होगा, लेबर की किल्लत से निपटने के लिए हम नई मंडी में 'ऑन-व्हील ऑक्शन' सिस्टम ला रहे हैं, जहां माल सीधे खरीदार के फड़ पर उतरेगा और एलिवेटर से लिफ्ट होगा।
कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए मंडी के अंदर सीधा रेलवे ट्रैक लाया जा रहा है, जिसका सर्वे पूरा हो चुका है। इसके बाद हम गुजरात का धनिया और महाराष्ट्र का माल भी सीधे कोटा में लाकर बेचेंगे। हम सरकार से जमीन मांग रहे हैं ताकि यहां धनिया, सरसों और लहसुन की कम से कम 500 एग्रो-प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाई जा सकें। पूरे भारत में कोटा अकेली ऐसी मंडी है, जहां किसी भी किसान का एक भी पैसा नहीं डूबता। हम मंडी में 800 सीटर एयर-कंडीशंड ऑडिटोरियम का निर्माण कर रहे हैं।
