नागरिक अभिव्यक्ति । राजस्थान
भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर जिले के वैर थाना क्षेत्र में स्टोन क्रेशर और माइनिंग लीज को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद रविवार, 11 अक्टूबर को हिंसक संघर्ष में बदल गया। भौंडा गांव में हुए इस घटनाक्रम में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए जयपुर के एसएमएस अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उनके सहयोगी गगन शर्मा भी झड़प में घायल हुए हैं। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई और पुलिस बल तैनात किया गया।
क्रेशर शुरू करने की कोशिश से फिर बढ़ा विवाद
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, भौंडा और रायपुर गांव के ग्रामीणों तथा क्रेशर संचालकों के बीच खनन लीज और वहां तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। करीब एक साल से बंद क्रेशर को दोबारा शुरू करने की कोशिश के बीच ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया था। ग्रामीणों का आरोप था कि चरागाह भूमि पर कब्जे और अवैध खनन से जुड़े मुद्दों का समाधान किए बिना काम फिर शुरू किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि ग्रामीण पिछले 10 से 15 दिनों से क्रेशर दोबारा चालू किए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। रविवार शाम जब भड़ाना क्रेशर स्थल पर पहुंचे, तब दोनों पक्षों के बीच कहासुनी बढ़ गई। स्थिति बिगड़ने पर मारपीट और पथराव शुरू हो गया।
दोनों पक्षों के आरोप, पुलिस जांच में जुटी
घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में 70 से 80 लोगों की भीड़ का उल्लेख है। ग्रामीणों का आरोप है कि भड़ाना अपने साथ लोगों को लेकर मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को हटाने की कोशिश की। वहीं, घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों की ओर से मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में विवाद की शुरुआत किसने की और हिंसा किन परिस्थितियों में बढ़ी, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
झड़प में अतर सिंह भड़ाना और उनके सहयोगी गगन शर्मा को गंभीर चोटें आईं। दोनों को पहले वैर के अस्पताल ले जाया गया। बाद में भड़ाना को जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनकी मौत हो गई। गगन शर्मा को उपचार के लिए भरतपुर भेजा गया।
खनन और जमीन के विवाद पर फिर उठे सवाल
यह घटना केवल दो पक्षों के बीच टकराव तक सीमित नहीं है। इसके पीछे खनन गतिविधियों, माइनिंग लीज तक पहुंचने के रास्ते और चरागाह भूमि को लेकर चल रहे विवाद की भूमिका की जांच जरूरी है। ग्रामीणों के आरोपों और क्रेशर संचालन से जुड़े विवाद के सभी पहलुओं की पड़ताल से ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
पुलिस ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि हिंसक संघर्ष की शुरुआत कैसे हुई, हमले में कौन-कौन शामिल था और लंबे समय से चले आ रहे विवाद का प्रशासनिक स्तर पर समाधान क्यों नहीं हो पाया।
