ADVERTISEMENT
ब्रेकिंग न्यूज़
• हाड़ौती अंचल: कोटा में नए रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट के लिए 120 करोड़ का अतिरिक्त बजट स्वीकृत • चुनाव आयोग ने आगामी निकाय चुनाव हेतु वोटर लिस्ट अपडेशन की समय सीमा बढ़ाई • राजस्थान बोर्ड परीक्षा 2026 की समय सारिणी घोषित, शिक्षा विभाग की बड़ी तैयारी • टी20 वर्ल्ड कप: भारतीय टीम ने दूसरे मुकाबले में भी दर्ज की धमाकेदार जीत
नागरिक अभिव्यक्ति
होम / ताजा खबर / लेख विस्तार
ताजा खबर

खाली हस्ताक्षरित चेक देना पड़ सकता है भारी, ‘सिक्योरिटी चेक’ में भी बरतें सावधानी

व्यापार से लेकर निजी उधार और बैंक ऋण तक, चेक देने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
अक्षर आकार:
खाली हस्ताक्षरित चेक देना पड़ सकता है भारी, ‘सिक्योरिटी चेक’ में भी बरतें सावधानी
खाली हस्ताक्षरित चेक देना पड़ सकता है भारी, ‘सिक्योरिटी चेक’ में भी बरतें सावधानी
ADVERTISEMENT
खबर शेयर करें:

कोटा। व्यापार, किराये, बैंक ऋण, निजी उधार, नौकरी, एजेंसी, वाहन या संपत्ति से जुड़े लेन-देन में कई बार ‘सिक्योरिटी’ के नाम पर खाली हस्ताक्षरित चेक देने की स्थिति बन जाती है। चेक देने वाला आमतौर पर यह मानकर चलता है कि उसमें उतनी ही राशि भरी जाएगी, जितनी वास्तव में देय है। लेकिन बाद में यही व्यवस्था आर्थिक और कानूनी विवाद का कारण बन सकती है।

किसी चेक पर हस्ताक्षर करने के बाद केवल यह कहना कि चेक खाली था या सिर्फ सुरक्षा के लिए दिया गया था, हर परिस्थिति में पर्याप्त बचाव नहीं माना जा सकता। इसलिए चेक सौंपते समय उद्देश्य, राशि और लेन-देन का स्पष्ट रिकॉर्ड रखना महत्वपूर्ण है।

खाली चेक पर सिर्फ हस्ताक्षर करके न दें

चेक जारी करते समय प्राप्तकर्ता का पूरा नाम, तारीख और राशि स्वयं भरना बेहतर है। राशि अंकों और शब्दों दोनों में स्पष्ट रूप से लिखें। खाली स्थानों पर लाइन खींचने से बाद में अतिरिक्त अंक या शब्द जोड़ने की संभावना कम की जा सकती है।

‘सिक्योरिटी चेक’ भी जोखिम से मुक्त नहीं

सिर्फ यह कह देना कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था, अपने आप में हर स्थिति का समाधान नहीं है। यदि सुरक्षा चेक देना आवश्यक हो तो लिखित रूप से यह स्पष्ट करना उपयोगी है कि चेक किस लेन-देन के लिए दिया गया है और किन परिस्थितियों में उसे प्रस्तुत किया जा सकता है।

अकाउंट-पेयी चेक का करें इस्तेमाल

जहां संभव हो, ‘Account Payee’ चेक देना अधिक नियंत्रित विकल्प हो सकता है। ‘Bearer’ चेक को अनावश्यक रूप से खुला छोड़ने से बचना चाहिए। इससे भुगतान को निर्धारित प्राप्तकर्ता तक सीमित रखने में मदद मिलती है।

चेक का पूरा रिकॉर्ड रखें

चेक नंबर, तारीख, राशि, बैंक और प्राप्तकर्ता का विवरण अपने रिकॉर्ड में सुरक्षित रखें। चेक सौंपने से पहले उसकी फोटो या स्कैन कॉपी रखना भी उपयोगी हो सकता है। इसके अलावा संबंधित अनुबंध, रसीद, ई-मेल, व्हाट्सऐप संदेश या अन्य लेन-देन संबंधी दस्तावेज सुरक्षित रखें।

देनदारी खत्म होने पर चेक वापस लें

यदि ऋण या अन्य देनदारी पूरी तरह चुका दी गई है और उसके बदले सुरक्षा चेक दिया गया था, तो चेक वापस लेना जरूरी है। संभव हो तो चेक की वापसी या देनदारी समाप्त होने की लिखित पुष्टि भी प्राप्त करें।

सिर्फ ‘स्टॉप पेमेंट’ पर निर्भर न रहें

बैंक को स्टॉप पेमेंट का निर्देश देने मात्र से हर प्रकार का कानूनी जोखिम समाप्त नहीं हो जाता। यदि चेक के पीछे वैध और वसूली योग्य देनदारी मौजूद है, तो परिस्थितियों के अनुसार चेक अनादरण से संबंधित कानूनी कार्रवाई का प्रश्न उठ सकता है।

लिखित रिकॉर्ड सबसे जरूरी

खाली हस्ताक्षरित चेक को सामान्य औपचारिकता मानकर देना जोखिमपूर्ण हो सकता है। लेन-देन कितना भी भरोसेमंद क्यों न हो, उसकी शर्तें और भुगतान का रिकॉर्ड लिखित रूप में रखना बेहतर है। खासतौर पर सुरक्षा चेक देते समय यह स्पष्ट होना चाहिए कि वह किस उद्देश्य से दिया गया है और देनदारी पूरी होने के बाद उसका क्या किया जाएगा।

विवेक नंदवाना

वरिष्ठ अधिवक्ता

ADVERTISEMENT
लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

comment पाठकों की प्रतिक्रिया (Comments)

अपनी राय दर्ज करें: