बूंदी, 6 अक्टूबर। नागरिक अभिव्यक्ति। जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार और व्यापारी अशोक गुप्ता की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर विभिन्न व्यापारिक संगठनों की ओर से मंगलवार को बुलाए गए बूंदी बंद का शहर में मिला-जुला असर देखने को मिला। व्यापारियों के दो गुटों में बंटने के कारण कई बाजारों में असमंजस की स्थिति बनी रही। दोपहर 12 बजे तक एक पक्ष दुकानदारों से प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील करता नजर आया, जबकि दूसरा पक्ष दुकानें खोलने के लिए व्यापारियों को समझाता रहा।
बंद का सबसे ज्यादा असर इंद्रा मार्केट में दिखाई दिया, जहां बड़ी संख्या में दुकानें बंद रहीं। वहीं शहर के अन्य प्रमुख बाजारों में अधिकांश प्रतिष्ठान खुले रहे। इस दौरान भाजपा के भीतर भी बंद के समर्थन और विरोध को लेकर अलग-अलग रुख सामने आए।
संयुक्त व्यापार महासंघ ने दावा किया कि राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के बावजूद बंद सफल रहा। महासंघ के अनुसार कई व्यापारियों ने जनहित की मांगों को ध्यान में रखते हुए स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। महासंघ ने स्पष्ट किया कि बंद किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या संस्था के विरोध में नहीं, बल्कि जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार और आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर किया गया।
जिला अस्पताल में सुधार की मांग
व्यापार महासंघ ने जिला अस्पताल में 24 घंटे इमरजेंसी में अनुभवी चिकित्सकों की उपलब्धता, कार्डियक मरीजों के लिए ट्रॉमा वार्ड में अलग यूनिट, पार्किंग शुल्क को लेकर शिकायतों पर कार्रवाई और इमरजेंसी में आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
महासंघ पदाधिकारियों के अनुसार आंदोलन के बाद जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में कुछ सुधार देखने को मिले हैं। जिम्मेदारी तय करने के साथ स्थानांतरण की कार्रवाई और प्रमुख चिकित्सा अधिकारी में बदलाव की कार्रवाई का भी उन्होंने उल्लेख किया।
पूर्व विधायक अशोक डोगरा ने बंद का किया समर्थन
बूंदी बंद को लेकर भाजपा में भी खींचतान नजर आई। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को बंद से दूरी रखने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई, लेकिन पूर्व विधायक अशोक डोगरा बंद के समर्थन में बाजारों में दिखाई दिए। उन्होंने व्यापारियों से बंद में शामिल होने की अपील की।
डोगरा ने चौगान गेट पर बंद समर्थकों के साथ सुंदरकांड का पाठ भी किया। सोमवार को जारी अपने वीडियो संदेश में उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर चिंता जताते हुए बंद के समर्थन की अपील की थी। उन्होंने कहा कि सरकार भाजपा की है और वह भी भाजपा से जुड़े हैं, लेकिन अस्पताल में लगातार हो रही घटनाओं और व्यवस्थाओं को लेकर वह चिंतित हैं। उन्होंने व्यापारी अशोक गुप्ता की मौत के मामले में जिम्मेदार चिकित्सकों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई।
कांग्रेस ने भी किया बंद का समर्थन
कांग्रेस ने भी बूंदी बंद को समर्थन दिया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष महावीर मीणा, चर्मेश शर्मा, वरिष्ठ पार्षद टीकम जैन, निशांत नुवाल, शहर अध्यक्ष शैलेष सोनी, मनीष मेवाड़ा और लोकेश ठाकुर सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता बाजारों में बंद के समर्थन में पहुंचे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए चिकित्सा विभाग का पुतला फूंका और नारेबाजी की।
दूसरे गुट ने दुकानें खुलवाने की कोशिश की
दूसरी ओर नगर परिषद सभापति भरत शर्मा, उप सभापति संजय भूटानी, पार्षद तुषार पारीक, भाजपा शहर अध्यक्ष राजकुमार श्रृंगी, व्यापार प्रकोष्ठ के जिला संयोजक मौजी नुवाल, व्यापार महासंघ अध्यक्ष निरंजन जिंदल सहित कई नेता और कार्यकर्ता बाजारों में व्यापारियों से प्रतिष्ठान खोलने की अपील करते नजर आए। इस दौरान दोनों पक्षों की गतिविधियों के कारण कुछ समय के लिए बाजारों में तनाव और असमंजस की स्थिति बनी रही।
पुलिस प्रशासन रहा अलर्ट
बंद और उससे जुड़े राजनीतिक एवं व्यापारिक घटनाक्रम को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरे दिन अलर्ट रहा। शहर के प्रमुख चौराहों और बाजारों में अतिरिक्त पुलिस जाप्ता तैनात किया गया। पुलिस अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था संभाली।
