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बूंदी किसान मेले में जुटे 1000 से अधिक किसान, मृदा स्वास्थ्य और जैविक खाद पर जोर

कृषि विज्ञान केंद्र और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की पहल, किण्वित जैविक खाद के उपयोग पर जागरूकता

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बूंदी किसान मेले में जुटे 1000 से अधिक किसान, मृदा स्वास्थ्य और जैविक खाद पर जोर
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नागरिक अभिव्यक्ति । बूंदी

कृषि में टिकाऊ उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के लिए मृदा स्वास्थ्य संरक्षण जरूरी है। इसी उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, बूंदी की ओर से भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के सहयोग तथा मारुति सुजुकी की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) परियोजना के तहत किसान मेला एवं प्रदर्शनी आयोजित की गई। ‘किण्वित जैविक खाद से समृद्ध मृदा, आय वृद्धि एवं पर्यावरण संतुलन’ विषय पर हुए आयोजन में 1000 से अधिक किसानों ने भाग लिया।

मुख्य अतिथि कृषि विश्वविद्यालय, कोटा की कुलगुरु डॉ. विमला डूंकवाल ने मृदा की उर्वरता बनाए रखने, टिकाऊ कृषि अपनाने और किसानों की आय बढ़ाने में किण्वित जैविक खाद की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिट्टी कृषि उत्पादन का आधार है और इसकी सेहत बनाए रखना भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी है। किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए तथा जैविक स्रोतों को खेती में शामिल करते हुए रासायनिक उर्वरकों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर के निदेशक डॉ. अरुण तोमर ने पशुपालन और भेड़ पालन को ग्रामीण आजीविका मजबूत करने तथा किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

परियोजना की जानकारी प्रधान वैज्ञानिक डॉ. कपिला शेखावत और परियोजना समन्वयक एवं भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के सस्य विज्ञान संभागाध्यक्ष डॉ. संजय सिंह राठौर ने दी। कृषि विश्वविद्यालय, कोटा के अनुसंधान निदेशक डॉ. एम.सी. जैन ने किसानोपयोगी अनुसंधान और नवीन तकनीकों के प्रसार, जबकि प्रसार शिक्षा निदेशालय के निदेशक डॉ. महेंद्र सिंह ने वैज्ञानिकों और किसानों के बीच समन्वय पर जोर दिया। कृषि विज्ञान केंद्र, बूंदी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. महेश चौधरी ने केंद्र की प्रशिक्षण, प्रदर्शन, ऑन-फार्म परीक्षण और तकनीकी परामर्श गतिविधियों की जानकारी दी।

तकनीकी सत्र में डॉ. विशाल त्यागी और डॉ. प्रवीण कुमार उपाध्याय ने मृदा स्वास्थ्य, जैविक स्रोतों तथा संतुलित पोषण प्रबंधन की जानकारी दी। कार्यक्रम में कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एन.एल. मीणा, कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक राजेश शर्मा, आत्मा के परियोजना निदेशक कौशल कुमार सोमानी, रिलायंस फाउंडेशन के डॉ. रामधन और डॉ. महेंद्र कुमार मीणा सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।

प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रदर्शनी में कृषि तकनीकों, कृषि यंत्रों, बीजों और मूल्य संवर्धित उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। अंत में अतिथियों ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और पुरस्कार वितरित किए। आयोजन में परियोजना से जुड़े यंग प्रोफेशनल्स ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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