नागरिक अभिव्यक्ति । बूंदी
बूंदी की ऐतिहासिक विरासत और पारंपरिक चित्रशैली विद्यार्थियों के कैनवास पर साकार हुई। भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटैक) चैप्टर बूंदी की ओर से आयोजित महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण सप्ताह के दूसरे दिन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में ‘मेरी विरासत’ विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता हुई। इसमें 35 छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर बूंदी और जिले के ऐतिहासिक स्मारकों तथा प्रसिद्ध बूंदी चित्रशैली को रंगों के माध्यम से उकेरा। प्रतियोगिता में तीन सर्वश्रेष्ठ चित्रों के लिए अभिषेक वर्मा, सावित्री प्रजापत और आयुष चित्तौड़ा को पुरस्कृत किया गया।
समारोह में इंटैक संयोजक राजकुमार दाधीच ने महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण को बूंदी की सांस्कृतिक विरासत का गौरव बताते हुए विद्यार्थियों को उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और कला के क्षेत्र में योगदान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महाकवि की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को समझना तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
महाविद्यालय के प्राचार्य राहुल सक्सेना ने कहा कि विरासत, संस्कृति, भाषा और कला का संरक्षण भावी पीढ़ी का नैतिक कर्तव्य है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में अपनी सांस्कृतिक धरोहर के प्रति जागरूकता बढ़ती है और उसके संरक्षण की भावना विकसित होती है।
चित्रकला विभाग के प्रवक्ता डॉ. आशीष कुमार श्रृंगी, डॉ. सतीश शर्मा, महेंद्र मीणा, मुकेश कुमार बिजारणिया, विकास कुमार मेरोठा, विष्णु मीणा, दीप चंद्र सिंह और राधेश्याम गुर्जर के निर्देशन में प्रतियोगिता आयोजित हुई। प्रतिभागियों ने अपनी कलात्मक कल्पना के जरिए बूंदी की ऐतिहासिक पहचान और चित्रकला परंपरा को प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर इंटैक चैप्टर बूंदी के सह-संयोजक राजेंद्र कुमार भारद्वाज, पंकज दाधीच, आराक नय्यर सहित महाविद्यालय के स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
