बूंदी। शहर के जैन दादावाड़ी में श्री जैन श्वेतांबर खतरगच्छ मूर्तिपूजक समिति के तत्वावधान में नौ दिवसीय नवपद आयंबिल ओली तप आराधना श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ जारी है। 18 से 26 अक्टूबर तक आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में जैन समाज के श्रावक-श्राविकाएं उत्साहपूर्वक भाग लेकर तप, संयम और आत्मशुद्धि की साधना कर रहे हैं। आयोजन के लाभार्थी भीम सिंह छाजेड़ एवं प्रमिला छाजेड़ हैं।
आत्मशुद्धि और संयम का पर्व है नवपद ओली
समाज के अध्यक्ष विमल भंडारी एवं समन्वयक अध्यक्ष अशोक भंडारी ने बताया कि नवपद आयंबिल ओली जैन धर्म का महत्वपूर्ण तप-आराधना पर्व है। यह प्रतिवर्ष चैत्र और अश्विन मास में नौ दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र और तप—इन नौ पदों की विशेष पूजा-अर्चना कर आत्मकल्याण की भावना से साधना करते हैं।
इस आराधना में आयंबिल तप का विशेष महत्व है। इसके तहत तपस्वी दिन में एक बार बिना तेल, घी, दूध, दही, शक्कर और मसालों के सादे उबले अनाज का सेवन करते हैं। यह तप इंद्रियों पर नियंत्रण, आत्मशुद्धि, कर्म निर्जरा और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम माना जाता है।
अनेक श्रावक-श्राविकाएं कर रहे तपस्या
नवपद आयंबिल ओली तप आराधना में कुशल सिंह चौधरी, शशि चौधरी, नौरत कोठारी, विद्या भंडारी, सुचिता छाजेड़, अलका छाजेड़, अन्नू भड़कत्या, नम्रता छाजेड़, विनिता छाजेड़, अमिता भंडारी, गुलाब कंवर भंडारी, शांता बुलिया, मीनाक्षी कोठारी एवं अनीता बोरदिया सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएं पूर्ण निष्ठा के साथ तपस्या कर रहे हैं।
व्यवस्थाओं में दे रहे योगदान
आयोजन की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में शकुंतला भंडारी एवं उर्मिला भंडारी नियमित रूप से योगदान दे रही हैं। वहीं कांता छाजेड़, शिक्षा छाजेड़, कांता भड़कत्या और श्वेता भंडारी ने भी सेवाएं दीं।
कार्यक्रम के दौरान सिंपल भंडारी एवं ख्याति भंडारी ने श्रद्धालुओं को प्रभावना वितरित की।
जैन समाज के अध्यक्ष विमल भंडारी एवं समन्वयक अध्यक्ष अशोक भंडारी ने सभी तपस्वियों की तपस्या की अनुमोदना करते हुए उनके सुख-साता की कामना की। यह आयोजन समाज में धार्मिक चेतना, संयम, तप और त्याग की परंपरा को मजबूत करने का माध्यम बन रहा है।
