बूंदी। जिले के नगर निकायों के आगामी चुनाव के लिए गुरुवार को जयपुर में आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। इसमें बूंदी नगर परिषद के सभापति पद को अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित किया गया है। इसी तरह लाखेरी नगर पालिका के सभापति पद पर भी अनारक्षित महिला वर्ग से अध्यक्ष चुना जाएगा। आरक्षण की घोषणा के बाद जिले की नगरीय राजनीति में संभावित दावेदारों और राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई है।
आरक्षण प्रक्रिया के अनुसार नैनवां नगर पालिका के चेयरमैन पद को ओबीसी ओपन रखा गया है। वहीं केशोरायपाटन नगर पालिका का सभापति पद अनुसूचित जाति (एससी) ओपन के लिए आरक्षित किया गया है। कापरेन और इंदरगढ़ नगर पालिकाओं के सभापति पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। नवगठित हिंडोली और देई नगर पालिकाओं के आरक्षण की घोषणा फिलहाल नहीं हुई है।
परिसीमन के बाद बदले सियासी समीकरण
नगर निकाय चुनाव परिसीमन के बाद होने जा रहे हैं। वार्डों की सीमाओं में बदलाव के साथ कई क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या भी बदली है। ऐसे में पहले से सक्रिय रहे पार्षदों और संभावित उम्मीदवारों को नए वार्डों के हिसाब से अपनी चुनावी रणनीति तैयार करनी होगी।
आरक्षण की घोषणा के बाद दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में टिकट को लेकर मंथन तेज होने की संभावना है। खासकर महिला सीटों के आरक्षित होने से नए चेहरों के साथ-साथ राजनीतिक परिवारों से जुड़े दावेदार भी सक्रिय हो सकते हैं। नगर निकायों में अध्यक्ष पद के लिए संभावित उम्मीदवारों को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
जिले में 230 वार्ड, 1.90 लाख से ज्यादा मतदाता
बूंदी जिले के नगर निकायों में कुल 230 वार्ड हैं, जिनमें 1 लाख 90 हजार 591 मतदाता हैं। जिले की सबसे बड़ी नगरीय निकाय बूंदी नगर परिषद है। यहां 60 वार्ड और 91 हजार 30 मतदाता हैं। वहीं लाखेरी नगर पालिका में 35 वार्ड और 22,259 मतदाता हैं।
अन्य नगर पालिकाओं में भी वार्डों की संख्या और मतदाता आबादी के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था तय की गई है। आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद अब राजनीतिक दल और संभावित प्रत्याशी चुनावी तैयारियों को गति देने में जुटेंगे। वहीं हिंडोली और देई नगर पालिकाओं के आरक्षण की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
