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बूंदी में लोकमंथन यात्रा का स्वागत, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का दिया संदेश

खटावदा गांव से बूंदी नगर तक हुए आयोजन, सत्यनारायण कुमावत ने गांवों को बताया भारतीय संस्कृति का जीवंत उदाहरण

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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बूंदी में लोकमंथन यात्रा का स्वागत, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का दिया संदेश
बूंदी में लोकमंथन यात्रा का स्वागत, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का दिया संदेश
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बूंदी, 19 अक्टूबर। भारतीय लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का संदेश लेकर निकाली जा रही लोकमंथन यात्रा का रविवार को बूंदी जिले के खटावदा गांव और बूंदी नगर में स्वागत किया गया। यात्रा के दौरान लोकगीतों, पारंपरिक खेलों, लोकनृत्यों, भजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्ध विरासत को प्रस्तुत किया गया।

खटावदा गांव में पारंपरिक तरीके से स्वागत

लोकमंथन यात्रा रविवार सुबह खटावदा गांव स्थित कुमावतों के नोहर पहुंची। यहां युवाओं, अधिवक्ता परिषद, शिक्षक संघ और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने यात्रा का स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक लोकगीतों और ग्रामीण खेलों का आयोजन हुआ।

बूंदी नगर में पुष्पवर्षा से अभिनंदन

रविवार शाम को यात्रा के बूंदी नगर पहुंचने पर विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। चिकित्सा प्रकोष्ठ, अधिवक्ता परिषद, सेवा भारती, संस्कृत भारती, विद्या भारती, एबीआरएसएम और मातृशक्ति सहित विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए

यात्रा के आदर्श विद्या मंदिर पहुंचने पर पारंपरिक खेल, सांस्कृतिक प्रदर्शनी और प्रबोधन गोष्ठी आयोजित की गई। स्थानीय लोक कलाकारों ने लोकनृत्यों और भजनों की प्रस्तुतियां दीं।

गांव भारतीय लोक संस्कृति के जीवंत उदाहरण : सत्यनारायण कुमावत

संगोष्ठी के प्रारंभ में लोकमंथन यात्रा के संयोजक सत्यनारायण कुमावत ने यात्रा की भूमिका प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि यात्रा का शुभारंभ 21 सितंबर को हुआ था। इसका समापन 4, 5 और 6 दिसंबर को जयपुर के जवाहर कला केंद्र में होगा।

कुमावत ने कहा कि भारतीय गांव लोक परंपराओं और संस्कृति के जीवंत उदाहरण हैं। गांवों में आज भी लोक आस्था, पारंपरिक मान्यताओं, आपसी सहयोग और सामाजिक समरसता की भावना दिखाई देती है। यात्रा के दौरान प्रत्येक गांव में स्थानीय लोगों के साथ लोकदेवताओं के सामूहिक दर्शन भी किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में सहकार और सामूहिकता की भावना निहित है। वर्तमान समय में लोकनीति की आवश्यकता है। लोकमंथन के माध्यम से ऐसा नया और प्रगतिशील विमर्श विकसित किया जाना चाहिए, जो समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करे।

संविधान समता, समरसता और समानता का संदेश देता है : जसवंत खत्री

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता जसवंत जी खत्री ने ‘हम भारत के लोग’ विषय पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का प्रवाह अनंत है और इसकी परंपराओं में विश्व बंधुत्व, सामूहिक चिंतन तथा समरसता का विशेष महत्व रहा है। भारत की प्राचीन गुरुकुल परंपरा और ‘जियो और जीने दो’ का जीवन-दर्शन सामाजिक सहअस्तित्व का संदेश देता है।

खत्री ने संविधान की प्रस्तावना की व्याख्या करते हुए समता, समानता और बंधुता के मूल्यों को समझाया। उन्होंने कहा कि एक होने के लिए एक जैसा होना जरूरी नहीं है, बल्कि मिल-जुलकर चलना आवश्यक है। संसाधनों का समुचित और समान वितरण समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बंधुता की भावना से समता और समानता मजबूत होती है।

उन्होंने कहा कि गैर-राजनीतिक सामाजिक चिंतन के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। राष्ट्र सर्वोपरि की भावना के साथ कार्य करना चाहिए और शत-प्रतिशत मतदान को प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी समझना चाहिए। सामूहिक सहभागिता से ही नए भारत के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभाई जा सकती है।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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