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लंपी स्किन डिजीज को लेकर जारी की गई एडवायजरी

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लंपी स्किन डिजीज को लेकर जारी की गई एडवायजरी
लंपी स्किन डिजीज को लेकर जारी की गई एडवायजरी
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बूंदी, 15 सितंबर। गोवंश के स्वास्थ्य और संरक्षण के मद्देनजर लंपी स्किन डिजीज को लेकर निदेशालय गोपालन राज. जयपुर की ओर से सभी पंजीकृत गोशालाओं, नंदीशालाओं और कांजी हाउसों के लिए बीमारी की रोकथाम, नियंत्रण और सघन देखभाल को लेकर एडवायजरी जारी की गई है। गोपालन निदेशालय की ओर से जारी निर्देशों के क्रम में अतिरिक्त जिला कलक्टर (सीलिंग) रमेश देव ने संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग बूँदी को आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया है।

पशुपालन विभाग को जारी निर्देशों के तहत लंपी एक वायरस जनित रोग है, जो मच्छरों, मक्खियों और चीचड़ों के माध्यम से फैलता है। गोवंश में तेज बुखार आना और त्वचा पर गांठे पड़ना इसके प्रमुख लक्षण हैं। गाइडलाइन के अनुसार, प्रारंभिक लक्षण दिखने पर बीमार गोवंश को स्वस्थ गोवंश से तुरंत अलग (आइसोलेट) करना अनिवार्य होगा। बीमार पशुओं को संभालने वाले परिचारकों (कर्मचारियों) और उनके उपकरणों को भी स्वस्थ पशुओं से अलग रखना होगा ताकि संक्रमण न फैले। इसके अलावा, संक्रमित पशुओं को किसी भी स्थिति में गोट पॉक्स या अन्य निर्धारित वैक्सीन नहीं लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

एडवायजरी के अनुसार गोशाला परिसरों में जलभराव रोकने और कीटनाशकों का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मच्छर-मक्खी न पनप सकें। बीमारी से यदि किसी गोवंश की मृत्यु हो जाती है, तो उसके शव का निस्तारण खुले में नहीं करें। शव का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से 1.5 मीटर गहरा गड्ढा खोदकर और उस पर चूना व नमक डालकर ही किया जाए।

रोग पर्यवेक्षण रजिस्टर का होगा संधारण

सभी गोशाला प्रबंधकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन गोवंश के स्वास्थ्य का निरीक्षण करें और 'रोग पर्यवेक्षण रजिस्टर' बनाएं। इस रजिस्टर में कुल गोवंश, बीमार, स्वस्थ हुए और मृत पशुओं का पूरा रिकॉर्ड दर्ज करना होगा। नए पशुओं को गोशाला में लाने पर उन्हें कुछ समय के लिए अलग (क्वारंटीन) बाड़े में रखना अनिवार्य होगा।

पशुपालक और गोशाला संचालक स्वयं से एंटीबायोटिक, स्टेरॉयड या दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल न करें। कोई भी उपचार केवल पंजीकृत पशु चिकित्सक के परामर्श से ही किया जाना चाहिए। किसी भी गोशाला में लंपी का संदिग्ध मामला सामने आने पर उसे छिपाने के बजाय तुरंत 24 घंटे के भीतर नजदीकी पशु चिकित्सालय को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद, जिले के सभी उपखण्ड अधिकारियों, नगर परिषद आयुक्त और नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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