नागरिक अभिव्यक्ति । बूंदी
पंचायतीराज चुनाव में प्रचार सामग्री छापने और प्रकाशित करने वालों के लिए नियमों की पालना अनिवार्य कर दी गई है। पोस्टर, पेम्फलेट और अन्य चुनावी प्रचार सामग्री पर अब मुद्रक व प्रकाशक का नाम-पता स्पष्ट रूप से अंकित करना होगा। साथ ही, मुद्रण से पहले प्रकाशक का निर्धारित घोषणा पत्र लेना और छपाई के तीन दिन के भीतर निर्धारित दस्तावेज व सामग्री की प्रतियां जिला निर्वाचन अधिकारी तथा संबंधित रिटर्निंग अधिकारी को भेजना अनिवार्य होगा। नियमों की पालना सुनिश्चित कराने के लिए जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला निर्वाचन अधिकारी हरफूल सिंह यादव ने जिले के सभी मुद्रणालयों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव-2026 की घोषणा के साथ जिले में आदर्श आचार संहिता प्रभावी है। इसी के मद्देनजर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 127-क के प्रावधानों के तहत चुनाव प्रचार सामग्री के मुद्रण और प्रकाशन में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्देशों के अनुसार, जिले के सभी मुद्रणालय निर्वाचन पेम्फलेट, पोस्टर और अन्य चुनावी सामग्री छापते समय मुद्रकीय हाशिये पर मुद्रक तथा प्रकाशक का नाम और पता स्पष्ट रूप से अंकित करेंगे। किसी भी चुनावी सामग्री की छपाई का काम शुरू करने से पहले प्रकाशक को निर्धारित घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने होंगे। इस घोषणा पत्र को ऐसे दो व्यक्तियों से सत्यापित कराना भी जरूरी होगा, जो प्रकाशक को व्यक्तिगत रूप से जानते हों। इसके बाद मुद्रक को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत घोषणा पत्र प्रमाणित करना होगा।
तीन दिन में जमा करवानी होंगी प्रतियां
जिला निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि मुद्रण के तीन दिन के भीतर प्रकाशक का निर्धारित घोषणा पत्र और मुद्रित निर्वाचन सामग्री की निर्धारित प्रतियां जिला निर्वाचन अधिकारी तथा संबंधित रिटर्निंग अधिकारी (उपखंड मजिस्ट्रेट) को भेजी जाएं। इसके साथ सामग्री की कुल मुद्रित प्रतियों की संख्या और छपाई के लिए ली गई राशि से संबंधित निर्धारित सूचना भी उपलब्ध करानी होगी।
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि किसी अभ्यर्थी या अभ्यर्थियों के समूह के पक्ष में प्रचार करने अथवा उनके निर्वाचन को प्रभावित करने के उद्देश्य से वितरित किए जाने वाले पेम्फलेट, पोस्टर, हैंडबिल और अन्य संबंधित मुद्रित सामग्री पर ये प्रावधान लागू होते हैं। ऐसी सामग्री के मुद्रण और प्रकाशन में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
उल्लंघन पर हो सकती है कार्रवाई
जिला मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रचार सामग्री के मुद्रण और प्रकाशन से संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा। नियम तोड़ने पर संबंधित मुद्रणालय, अभ्यर्थी या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध प्रचलित विधिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें नियमानुसार मुद्रणालय के अनुज्ञापत्र के संबंध में कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे चुनाव संबंधी कानूनी प्रावधानों और आयोग के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही या विफलता पाए जाने पर उनके विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।
जिला मजिस्ट्रेट ने जिले के सभी मुद्रणालय संचालकों, अभ्यर्थियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से अपील की है कि वे चुनावी प्रचार सामग्री के मुद्रण एवं प्रकाशन में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 127-क तथा राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों की पूरी पालना सुनिश्चित करें।
