बूंदी। जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ के तत्वावधान में चल रहे पर्यूषण पर्व के चौथे दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं में धर्माराधना और तपस्या को लेकर उत्साह देखने को मिला। सुबह श्रावक-श्राविकाओं ने भगवान की अंग पूजा, देव वंदन और आरती की। समाज के अनेक साधक चार उपवास, एकासन सहित विभिन्न प्रकार की तपस्याएं कर रहे हैं।
इस अवसर पर जयपुर से आए स्वाध्यायकार विपिन छाजेड़ ने प्रवचन के दौरान भगवान महावीर स्वामी के 27 भवों की विस्तृत वांचना कराई। उन्होंने भगवान महावीर के पूर्व भवों और कर्मों से जुड़े प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार विभिन्न भवों में किए गए कर्मों का क्षय करते हुए भगवान अंतिम भव में तीर्थंकर बने।
प्रवचन में भगवान महावीर के गर्भ परिवर्तन का प्रसंग भी बताया गया। वांचना के अनुसार भगवान महावीर पहले देवानंदा की कोख में आए, लेकिन राजकुल में जन्म न होने के कारण देवताओं के आदेश से उनका गर्भ माता त्रिशला के गर्भ में स्थापित किया गया। इसके बाद माता त्रिशला को 14 शुभ स्वप्न आए।
इन 14 स्वप्नों में हाथी, वृषभ, सिंह, पुष्पों की माला, सूर्य, चंद्रमा, लक्ष्मी, क्षीर समुद्र, ध्वजा, स्वर्ण कलश, पद्म सरोवर, दिव्यलोक, रत्नों की राशि और अग्निशिखा शामिल हैं। राजा सिद्धार्थ द्वारा इन स्वप्नों के संबंध में शास्त्रकारों से पूछे जाने पर बताया गया कि उनके घर ऐसे पुत्र का जन्म होगा, जो आगे चलकर तीर्थंकर बनेगा।
कार्यक्रम के दौरान भगवान की अंगी-अतिका छाजेड़ एवं बहु मंडल के सहयोग से संपन्न हुई। समाज की ओर से साधकों की तपस्या और धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम भी जारी है।
समाज अध्यक्ष अशोक भंडारी एवं सकल जैन समाज सचिव आदित्य भंडारी ने बताया कि पर्यूषण पर्व के दौरान शाम को प्रतिक्रमण किया जाता है और सभी जीवों से क्षमा याचना की जाती है। पर्व के तहत आज पुस्तकजी का जुलूस भी निकाला जाएगा।
