बूंदी। डिजिटल युग में पत्र लेखन के महत्व और सामाजिक संवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अंबेडकर भवन में राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘डिजिटल युग में पत्र लेखन का महत्व’ एवं पुस्तक विमोचन समारोह आयोजित किया गया। इसमें बूंदी के चयनित प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में तीन पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।
प्रशासनिक अधिकारी, विचारक एवं लेखक डॉ. सूरज सिंह नेगी ने कहा कि पत्र लेखन के माध्यम से रिश्तों में बढ़ती दूरियों, सामाजिक संवेदनहीनता और आपसी संवाद की कमी को दूर करने का प्रयास किया जा सकता है।
उन्होंने पत्र लेखन को भावनाओं की अभिव्यक्ति और सामाजिक जुड़ाव का प्रभावी माध्यम बताया।
रेखा शर्मा, उम्मे हबीबा और अनिल वर्मा को सम्मान
श्रेष्ठ पत्र लेखन एवं पत्र वाचन के लिए बूंदी की रेखा शर्मा और उम्मे हबीबा का चयन किया गया। वहीं, पाती लेखन अभियान में योगदान के लिए रेखा शर्मा, उम्मे हबीबा और अनिल वर्मा को ‘पाती प्रेरक सम्मान’ प्रदान किया गया। उन्हें प्रमाण पत्र और पुस्तकें देकर सम्मानित किया गया।
समारोह में अखिल भारतीय पाती लेखन प्रतियोगिता के चयनित पत्रों पर आधारित पुस्तक ‘लिख दी चिट्ठिया माई को’, ‘पाती अपनों को मुहिम : एक अनवरत यात्रा’ और बाल लेखकों की पुस्तक ‘पेड़ हमारे जीवनदाता’ का विमोचन किया गया।
सानिया खान और कृतिन सनाढ्य को सांत्वना पुरस्कार
‘पेड़ हमारे जीवनदाता’ बाल लेखन प्रतियोगिता में बूंदी की श्री रघुनाथ अकैडमी की सानिया खान और लिटिल एंजेल स्कूल के कृतिन सनाढ्य को सांत्वना पुरस्कार मिला। दोनों को 500-500 रुपये, पुस्तक और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस पुस्तक में दोनों विद्यालयों के 10 विद्यार्थियों के पत्र प्रकाशित हुए हैं। इनमें नैना मीणा, नेहल सैनी, अनन्या, हिमांशु, नेहल चोपदार, डॉली, अतफ जहाँ और दिव्यांश सहित अन्य विद्यार्थी शामिल हैं।
वहीं, ‘पाती अपनों को मुहिम : एक अनवरत यात्रा’ में रेखा शर्मा तथा विद्यार्थियों केशव और भावेश के पत्र भी प्रकाशित किए गए हैं। पुस्तकों में स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को भी पुस्तकें और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
2018 से अब तक लिखवाए करीब साढ़े तीन लाख पत्र
आयोजक डॉ. सूरज सिंह नेगी के अनुसार, वर्ष 2018 से अब तक 24 विषयों पर आयोजित पाती लेखन प्रतियोगिताओं के माध्यम से स्कूली बच्चों सहित लगभग साढ़े तीन लाख पत्र लिखवाए जा चुके हैं। चयनित पत्रों पर आधारित अधिकांश पुस्तकों का प्रकाशन भी हो चुका है।
समारोह में जोधपुर, जयपुर, कोटा, बूंदी, अजमेर, टोंक, सवाई माधोपुर, श्रीगंगानगर और दिल्ली सहित विभिन्न स्थानों से साहित्यकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पत्र लेखन की परंपरा को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को लिखित संवाद से जोड़ने पर जोर दिया गया।
