नागरिक अभिव्यक्ति | बूंदी
राजीविका से मिले प्रशिक्षण और सहयोग ने रैना कुमारी को आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया। कभी परिवार की आय सीमित थी और नियमित रोजगार का साधन नहीं था। अब वे ‘पशु सखी’ के रूप में पशुपालकों को जागरूक कर रही हैं और गांव की महिलाओं को पोषण वाटिका तैयार करने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
रैना ने प्रशिक्षण के दौरान पशुओं के टीकाकरण और डीवर्मिंग के साथ किचन गार्डन यानी पोषण वाटिका तैयार करने की तकनीक सीखी। इसके बाद उन्होंने घर के आसपास उपलब्ध छोटी-सी जगह में सब्जियां उगाना शुरू किया। इससे परिवार को ताजी सब्जियां घर पर मिलने लगीं और बाजार से सब्जियां खरीदने पर होने वाला खर्च भी कम हुआ।
रैना की पहल से प्रेरित होकर गांव की अन्य महिलाएं भी पोषण वाटिका बनाने में रुचि लेने लगीं। रैना उन्हें बीज तैयार करने, पौध रोपण और खेतों में जैविक खाद के उपयोग की जानकारी देती हैं। ‘पशु सखी’ की भूमिका में वे पशुपालकों को पशुओं के नियमित टीकाकरण और डीवर्मिंग के महत्व के प्रति भी जागरूक कर रही हैं। उनकी पहल गांव में महिलाओं और पशुपालकों के बीच आत्मनिर्भरता तथा बेहतर देखभाल का संदेश पहुंचा रही है।
