भीमलत के जोन नंबर तीन में ऑनलाइन बुकिंग के 3 साल बाद भी शुरू नहीं हुई जंगल सफारी
कृष्ण कांत राठौर @ बूंदी
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए तीन साल पहले शुरू हुई जंगल सफारी पर्यटकों को रास नहीं आई है और तीन में से एक सफारी रूट पर ही गिनती के पर्यटक सफारी कर रहे हैं। टाइगर रिजर्व के जोन नंबर तीन पर तो अभी तक जंगल सफारी शुरू ही नहीं हो सकी है। राजस्थान वन विभाग की वेबसाइट पर रामगढ़ विषधारी के लिए ऑनलाइन सफारी की व्यवस्था है तथा बफर क्षेत्र के तीन सफारी जोन पर तीन सालों से बुकिंग हो रही है। इनमें जोन नंबर 1 में बूंदी शहर से सटी टाइगर हिल, जोन नंबर 2 में सूरज छतरी और जोन नंबर 3 में भीमलत शामिल है।
वर्तमान में नियमित पर्यटक सफारी मुख्य रूप से जोन नंबर 1 की टाइगर हिल, झरबंधा व गुमान बावड़ी क्षेत्र के जंगल में ही संचालित हो रही है। इस क्षेत्र में भी बहुत कम पर्यटक सफारी पर जाते हैं। इस साल अप्रैल से अब तक करीब 15 विदेशी पर्यटकों ने रामगढ़ में जंगल सफारी की है। देशी पर्यटकों की भी अभी तक यहां पहुंच कम ही बनी हुई है। गौरतलब है कि रामगढ़ विषधारी में सफारी की शुरुआत 23 जून 2023 को बफर क्षेत्र से हुई थी। वहीं कोर क्षेत्र के रामगढ़ महलों व मेज नदी क्षेत्र में पर्यटक सफारी शुरू करने का मामला अभी तक स्वीकृति एवं बाघ संरक्षण योजना से जुड़ा हुआ है। मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार कोर क्षेत्र की सफारी शुरू करने के लिए बाघ संरक्षण योजना में आवश्यक संशोधन और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है। दूसरी ओर कालदां, डाटून्दा, देवझर महादेव आदि इलाकों में इको पर्यटन की संभावनाएं हैं लेकिन अभी तक इस क्षेत्र में कोई काम नहीं हुआ है। यह इलाका टेरिटोरियल डीएफओ के नियंत्रण में होने से टाइगर रिजर्व प्रबंधन इस क्षेत्र को विकसित करने में रुचि नहीं ले रहा है।
कोर क्षेत्र में सफारी की नहीं मिली अनुमति
रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व में टाइगर देखने की इच्छा लेकर आने वाले देशी विदेशी पर्यटकों को निराश होना पड़ रहा है। टाइगर रिजर्व में लगभग सभी टाइगर कोर क्षेत्र के जंगलों व रामगढ महल के आसपास की टेरेटरी में है। यहां अभी तक टाइगर सफारी की स्वीकृति नहीं होने से टाइगर की साइटिंग नहीं होती है। बफर जोन में भी अभी तक भीमलत सफारी शुरू नहीं होने से पर्यटकों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसी तरह जैवविविधता से समृद्ध तलवास क्षेत्र के किला अजीतगढ़ में भी विभाग ने दो साल पहले ट्रेक बनवाया था लेकिन अभी तक इसे नया सफारी रूट नहीं बनाया जा सका है।
भीमलत व कालदां के बफर जोन बन सकते है इको टूरिज्म का प्रमुख केंद्र
वन विभाग ने टाइगर रिजर्व के जैवविविधता से समृद्ध भीमलत व बांका भोपतपुरा के बफर क्षेत्र में गिद्ध व भेड़िया संरक्षण की योजना के काम हाथ में लिए है तथा कालदां में भी ट्रेक आदि के काम हाथ में लिए है। टाइगर रिजर्व की नवगठित भोपतपुरा रेंज में उपरमाल के पठार पर 800 हेक्टेयर के विशाल वन क्षेत्र को भेड़ियों व गिद्धों के संरक्षण क्षेत्र के रूप में चिह्नित कर काम शुरू कर दिये हैं। टाइगर रिजर्व के कोर प्रशासन ने बफर जोन में आने वाले इन महत्वपूर्ण जंगलों को बाघों के साथ साथ अन्य वन्यजीवों के अनुकूल बनाने की पूरी तैयारी कर ली है तथा उम्मीद है कि जल्दी ही इसके सकारात्मक परिणाम आएंगे। योजना के तहत टाइगर रिजर्व क्षेत्र की भोपातपुरा रेंज में भीलवाड़ा जिले के बांका, भोपातपुरा, जलिन्द्री, सुंठी, भड़क्या माताजी का नाला, सीताकुंड तथा बून्दी जिले के कालदां, भीमलत व मुंदेड़ वन खंड को इनके संरक्षण के लिए सबसे अच्छे जंगल माना गया है। यहां पर भीमलत की प्राकृतिक वादियां, बाणगंगा नदी के पास भाला का जंगल, भोपातपुरा के पास भड़क्या माताजी का जंगल व गरड़दा व अभयपुरा बांधो के बीच मुंदेड़ का पठार भेड़ियों व गिद्धों के संरक्षण स्थल के रूप में विकसित होंगे। इसी तरह कालदां क्षेत्र में बाघिन आरवीटी-8 की मौजूदगी होने से यहां आने वाले पर्यटक बाघों के साथ साथ भेड़ियों व गिद्धों का भी दीदार कर सकेंगे तथा बूंदी में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।
टाइगर रिजर्व के भीमलत बफर जोन में पर्यटकों के लिए रूट व एंट्री गेट बने हुए है लेकिन बूंदी से दूरी अधिक होने से इस रूट पर कोई जिप्सी लगाने को तैयार नहीं है। यदि स्थानीय लोग भीमलत क्षेत्र में पर्यटन के लिए जिप्सी लगाना चाहे तो विभाग इस रूट पर भी पर्यटन गतिविधियां शुरू करने के लिए तैयार है। - अरुण कुमार डी, उपवन संरक्षक एवं उपक्षेत्र निदेशक, रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व (कोर) बूंदी
