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चांदनी रात में चांदी-सा चमकता कड़ाया, रामगढ़ के जंगलों का ‘भूतिया पेड़’

चट्टान पर टिका प्रकृति का अनूठा करिश्मा, सफेद छाल के कारण कहलाता है ‘घोस्ट ट्री’; वन्यजीव प्रेमी पृथ्वी सिंह राजावत ने बताया वृक्ष का महत्व

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चांदनी रात में चांदी-सा चमकता कड़ाया, रामगढ़ के जंगलों का ‘भूतिया पेड़’
चांदनी रात में चांदी-सा चमकता कड़ाया, रामगढ़ के जंगलों का ‘भूतिया पेड़’
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नागरिक अभिव्यक्ति । बूंदी

घने जंगल, गहरी खाइयां और दुर्गम चट्टानें… इनके बीच एक पेड़ ऐसा भी है, जो चांदनी रात में चांदी की तरह चमकता है। इसकी सफेद छाल अंधेरे में ऐसी आभा बिखेरती है कि देखने वाला कुछ पल ठिठक जाए। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कालदां बफर जोन में भूकी के गहरे नाले की एक चट्टान पर असाधारण रूप से टिका कड़ाया का यह वृक्ष प्रकृति के सौंदर्य और जीवटता की अनूठी मिसाल है। अपनी विशिष्ट पहचान के कारण इसे जंगल का ‘भूतिया पेड़’ भी कहा जाता है।

वन्यजीव प्रेमी पृथ्वी सिंह राजावत के अनुसार, कड़ाया (Sterculia urens) की हल्की सफेद और चमकीली छाल के कारण अंग्रेजी में इसे ‘घोस्ट ट्री’ नाम मिला है। जंगल के गहरे रंगों के बीच इसका सफेद तना दूर से ही अलग दिखाई देता है। रात के सन्नाटे में जब चांदनी इसकी छाल पर पड़ती है, तो पेड़ चांदी-सा चमकने लगता है। अनजान व्यक्ति को अंधेरे में इसकी आकृति कुछ देर के लिए भ्रमित भी कर सकती है। यही विशेषता इसे जंगल के दूसरे वृक्षों से अलग पहचान देती है।

गोंद से लेकर व्यावसायिक उपयोग तक पहचान

कड़ाया केवल अपनी अनोखी बनावट और खूबसूरती के लिए ही खास नहीं है, बल्कि इसका आर्थिक महत्व भी है। इसे गोंद-कड़ाया, कुल्लू और कतीरा जैसे स्थानीय नामों से भी जाना जाता है। इसके तने से निकलने वाले गोंद का इस्तेमाल विभिन्न औद्योगिक और व्यावसायिक कार्यों में किया जाता है। इसकी लकड़ी से कुछ स्थानों पर सजावटी वस्तुएं और उपयोगी सामान भी बनाए जाते रहे हैं।

आर्थिक उपयोगिता के चलते इस वृक्ष का संरक्षण भी महत्वपूर्ण हो जाता है। पेड़ों की कटाई और प्राकृतिक आवासों पर बढ़ता दबाव जंगल की वनस्पति को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में कड़ाया जैसे वृक्षों को बचाना वन संपदा और प्राकृतिक पारिस्थितिकी के संरक्षण की दृष्टि से जरूरी है।

चट्टान पर जीवन का अद्भुत उदाहरण

भूकी के गहरे नाले में चट्टान पर टिका यह पेड़ प्रकृति की उस क्षमता को दर्शाता है, जिसमें कठिन परिस्थितियों के बावजूद जीवन अपनी जगह बना लेता है। दुर्गम चट्टानों और गहरी खाइयों के बीच खड़े ऐसे वृक्ष जंगलों की प्राकृतिक विरासत हैं। इनका महत्व केवल एक प्रजाति तक सीमित नहीं है। जंगलों की वनस्पति पक्षियों, कीटों और वन्यजीवों सहित असंख्य जीवों के जीवन से जुड़ी होती है।

राजावत के अनुसार, रामगढ़ विषधारी के जंगलों में मौजूद ऐसे अनूठे वृक्ष याद दिलाते हैं कि जंगल केवल बाघों और दूसरे वन्यजीवों का ठिकाना नहीं, बल्कि प्रकृति के अनगिनत रहस्यों, दुर्लभ दृश्यों और जैव विविधता का संसार भी हैं। जरूरत है कि इन प्राकृतिक धरोहरों को पहचाना जाए, इनके महत्व को समझा जाए और इनके संरक्षण के प्रयास किए जाएं।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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