बूंदी | नागरिक अभिव्यक्ति। राजस्थान के कई जिलों में सूखे जैसी परिस्थितियों की चर्चा के बीच बूंदी के रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के जंगलों में अक्टूबर माह में भी प्राकृतिक झरनों की कलकल जारी है। यहां पहाड़ी दर्रों से बहते झरने वन क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता बढ़ा रहे हैं और जैव विविधता से समृद्ध वातावरण को जीवंत बनाए हुए हैं।
बूंदी के पर्यावरणविद पृथ्वी सिंह राजावत ने बताया कि बाघिन आरवीटी-8 की टेरिटरी वाले टाइगर रिजर्व के कालदां बफर जोन में प्राकृतिक झरनों की संख्या अधिक है। यहां करीब 8 किलोमीटर लंबे पहाड़ी नाले में आधा दर्जन से अधिक झरने अभी भी बह रहे हैं।
सौ फीट ऊंचाई से गिरता भूकी जलप्रपात
राजावत के अनुसार, क्षेत्र का भूकी जलप्रपात करीब 100 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है। इसकी कलकल ध्वनि घने और शांत जंगल में प्राकृतिक संगीत जैसा वातावरण तैयार करती है। भीमलत और मैनाल के प्रसिद्ध झरनों की तरह यह जलप्रपात भी बूंदी के प्राकृतिक वैभव को दर्शाता है।
कई स्थानों पर अब भी बह रहा पानी
कालदां बफर जोन के पहाड़ी नाले में भूकी जलप्रपात के अलावा छोटा डबका, बड़ा डबका, मंझला डबका, सगस जी का दह और देवनारायण की कुई जैसे प्राकृतिक जलस्रोत भी शामिल हैं। करीब 8 किलोमीटर के इस क्षेत्र में अब तक पानी का प्रवाह बने रहने से यहां के प्राकृतिक परिदृश्य की विशेषता सामने आती है।
वन्यजीवों और जैव विविधता के लिए अहम प्राकृतिक क्षेत्र
रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व का यह इलाका वन्यजीवों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पहाड़ी नाले और प्राकृतिक जलस्रोत वन क्षेत्र के पर्यावरण को समृद्ध बनाते हैं। अक्टूबर में भी झरनों का बहना बूंदी के जंगलों की प्राकृतिक विविधता को रेखांकित करता है।
