डेढ़ साल से अकेली आरवीटी-8, कालदां में नहीं मिला जोड़ीदार
बाघिन के बार-बार हाईवे पार करने से सुरक्षा की चिंता, वन्यजीव प्रेमियों ने उठाई बफर क्षेत्र में बेहतर प्रबंधन की मांग
बूंदी। रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में विचरण कर रही बाघिन आरवीटी-8 को करीब डेढ़ साल से जोड़ीदार नहीं मिला है। रणथंभौर से लाई गई करीब चार वर्षीय बाघिन कालदां, सूरज छतरी और भीमलत तक आवाजाही कर रही है। इस दौरान उसके बार-बार हाईवे पार कर टाइगर हिल पहुंचने से सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। वन्यजीव प्रेमियों ने कालदां क्षेत्र में बाघों के अनुकूल हालात विकसित करने और शिकार के लिए वन्यजीवों की उपलब्धता बढ़ाने की मांग की है।
वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बफर क्षेत्र घोषित होने के बावजूद कालदां में आवास सुधार और प्रबंधन के पर्याप्त प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। उनका आरोप है कि बाघिन की लंबे समय से मौजूदगी के बाद भी क्षेत्र को उसके अनुकूल विकसित करने पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि, वन विभाग ने नियमित निगरानी और जंगल को बाघों के अनुकूल बनाने के प्रयास जारी होने की बात कही है।
टाइगर हिल तक पहुंची, फिर कालदां लौटी
बताया जा रहा है कि आरवीटी-8 तीन बार टाइगर हिल क्षेत्र में पहुंच चुकी है, लेकिन वहां ठहरने के बजाय वापस कालदां लौट गई। यह क्षेत्र बाघिन आरवीटी-3 की टेरिटरी बताया जाता है। बाघ आरवीटी-1 की मौजूदगी भी आरवीटी-3 के साथ बनी हुई है। ऐसे में आरवीटी-8 को अब तक जोड़ीदार नहीं मिल सका है। हालांकि, टाइगर हिल की ओर उसकी आवाजाही का कारण केवल जोड़ीदार की तलाश है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
सुरक्षित आवास और शिकार की उपलब्धता पर जोर
वन्यजीव प्रेमियों के अनुसार बफर क्षेत्र में सुरक्षित आवास, पर्याप्त शिकार और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना जरूरी है। उनका कहना है कि कालदां क्षेत्र के बेहतर प्रबंधन से बाघों के संरक्षण के साथ बूंदी में इको टूरिज्म की संभावनाओं को भी मजबूती मिल सकती है।
नियमित निगरानी कर रहे हैं : फील्ड डायरेक्टर
“बाघिन आरवीटी-8 की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है और कालदां के जंगलों को बाघों के अनुकूल बनाने के प्रयास कर रहे हैं। यदि आवश्यकता हुई तो कालदां क्षेत्र के जंगलों को कोर प्रबंधन में शामिल करेंगे।”
— सुगनाराम जाट, फील्ड डायरेक्टर, रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व, बूंदी
