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बूंदी रेडक्रॉस सोसायटी के फंड खर्च पर अदालत की रोक, तय नियमों के पालन के निर्देश

अस्थायी निषेधाज्ञा का प्रार्थना पत्र आंशिक रूप से स्वीकार; सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बिना निधि से नहीं होगा कोई व्यय

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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बूंदी रेडक्रॉस सोसायटी के फंड खर्च पर अदालत की रोक, तय नियमों के पालन के निर्देश
बूंदी रेडक्रॉस सोसायटी के फंड खर्च पर अदालत की रोक, तय नियमों के पालन के निर्देश
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बूंदी, 1 नवंबर । इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी बूंदी के कोष और उसके उपयोग से जुड़े मामले में सिविल न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। सिविल न्यायाधीश तनु शर्मा ने सोसायटी के सदस्य मुकेश दाधीच, रामनिवास मीना, महेश कुमार गुप्ता और संजय शर्मा की ओर से प्रस्तुत अस्थायी निषेधाज्ञा के प्रार्थना पत्र को सुनवाई के बाद आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया।

न्यायालय ने निर्देश दिए हैं कि रेडक्रॉस सोसायटी की निधि का उपयोग उसके निर्धारित उद्देश्यों और उपनियमों के विपरीत नहीं किया जाए। राशि खर्च करने से पहले नियमानुसार आवश्यक अनुमोदन और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बिना निधि से कोई व्यय या कार्य नहीं किया जा सकेगा।

सड़क किनारे सौंदर्यीकरण कार्य पर उठे सवाल

अदालत ने आदेश में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की दीवार के सहारे शहर में कराए गए सौंदर्यीकरण कार्य का विशेष उल्लेख किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह का कार्य रेडक्रॉस सोसायटी के निर्धारित कानूनी उद्देश्यों की श्रेणी में नहीं आता है।

नए सदस्यों की मान्यता के मुद्दे पर भी न्यायालय ने टिप्पणी की। आदेश के अनुसार, भले ही अधिकृत व्यक्तियों की ओर से रसीदें जारी की गई हों, लेकिन नए सदस्यों की सूची राज्य शाखा को भेजने और वहां से अनुमोदन मिलने के समर्थन में सोसायटी की ओर से कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।

व्यापक जनहित को बताया महत्वपूर्ण

याचिकाकर्ता मुकेश दाधीच और सदस्य चंद्रप्रकाश दौराश्री के अनुसार, अदालत ने माना कि यदि मौजूदा कार्यकारिणी संस्था के संविधान के विपरीत जाकर निधि का उपयोग करती है, तो इससे केवल व्यक्तिगत अधिकार प्रभावित नहीं होते, बल्कि उन सभी लोगों के हित भी प्रभावित होते हैं जिनके कल्याण के लिए यह राशि एकत्रित की गई है। ऐसे मामलों में व्यापक जनहित को ध्यान में रखना आवश्यक है।

मामले में अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को तय की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अरविंद शर्मा, अजय नुवाल और राजकुमार गौतम ने पैरवी की।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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