नागरिक अभिव्यक्ति । बूंदी
महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण की वीरता, राष्ट्रभक्ति और साहित्यिक विरासत से नई पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटेक) चैप्टर बूंदी की ओर से जन्मोत्सव सप्ताह के तहत विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में शनिवार को राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल, विकास नगर में व्याख्यानमाला और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता हुई। इसमें छात्राओं को महाकवि के साहित्य, विरासत और सांस्कृतिक योगदान से जुड़ी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में इंटेक चैप्टर बूंदी के संयोजक राजकुमार दाधीच ने महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण को षट्भाषा का ज्ञाता बताते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में स्वतंत्रता के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाई देती है। उनकी प्रसिद्ध कृति ‘वीर सतसई’ में आजादी के प्रति उनकी दीवानगी और वीरता की भावना स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। उन्होंने कहा कि यदि उस समय राजस्थान के शासकों ने सूर्यमल्ल मिश्रण की बात मानी होती, तो संभवतः देश 1857 की क्रांति के समय ही स्वतंत्र हो गया होता।
विद्यालय के प्राचार्य रविंद्र दाधीच ने कहा कि सूर्यमल्ल मिश्रण बूंदी के ऐसे महान साहित्यकार और नायक हैं, जिन्हें याद करना और उनके विचारों से नई पीढ़ी को परिचित कराना जरूरी है। उनकी साहित्यिक विरासत युवाओं में इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के प्रति रुचि जगाने का माध्यम बन सकती है।
प्रश्नोत्तरी में छात्राओं ने दिखाया उत्साह
कार्यक्रम के दौरान इंटेक चैप्टर के सह-संयोजक राजेंद्र कुमार भारद्वाज, अशोक तलवास और ऋतुराज दाधीच ने छात्राओं के लिए विरासत, संस्कृति और महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण से संबंधित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की। छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए सवालों के जवाब दिए।
प्रतियोगिता में हिमांशी कुमावत, नव्या, पायल, गुंजन कुमावत, मिमिक्षा राजपुरोहित, निमारा, हर्षिता गुर्जर, पायल मीणा और पायल प्रजापत ने पुरस्कार प्राप्त किए। इंटेक चैप्टर बूंदी की ओर से विजेता छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर इंटेक की ओर से विद्यालय के प्राचार्य रविंद्र दाधीच को स्मृति चिह्न भी भेंट किया गया।
कार्यक्रम में उपाचार्य हरिराम मीणा, दीपक जैन, राकेश कुमार सुहल, लेखराज मीणा, सुरेखा मीणा सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
आज नवल सागर पर होगा दीपदान
महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण जन्मोत्सव सप्ताह के तहत रविवार शाम 5:30 बजे बूंदी के नवल सागर तालाब पर दीपदान कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। आयोजन के माध्यम से महाकवि की स्मृति और बूंदी की सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाएगा।
