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इंजेक्शन लिखने के कमीशन के नाम पर मांगे 1500 रुपए, एसीबी ने डॉक्टर को ट्रैप किया

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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इंजेक्शन लिखने के कमीशन के नाम पर मांगे 1500 रुपए, एसीबी ने डॉक्टर को ट्रैप किया
इंजेक्शन लिखने के कमीशन के नाम पर मांगे 1500 रुपए, एसीबी ने डॉक्टर को ट्रैप किया
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बूंदी। सरकारी अस्पताल में इंजेक्शन लिखने के बदले कथित कमीशन मांगने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने सुवासा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तत्कालीन चिकित्साधिकारी डॉ. गौरव मुंदड़ा के खिलाफ कार्रवाई की थी। आरोप था कि डॉक्टर ने मेडिकल स्टोर संचालकों से इंजेक्शन की सप्लाई के बदले 1500 रुपए की रिश्वत मांगी। एसीबी की जांच के अनुसार, ट्रैप कार्रवाई के दौरान रिश्वत की राशि बरामद की गई और आरोपी के हाथों के धुलाई नमूनों की जांच में फिनॉल्फ्थेलीन पाउडर तथा सोडियम कार्बोनेट की उपस्थिति मिली।

इंजेक्शन की सप्लाई के बदले कमीशन मांगने का आरोप

एसीबी को दी गई शिकायत के अनुसार, परिवादी जगदीश शर्मा निवासी सुवासा ने बताया था कि उनके चाचा रामलक्ष्मण शर्मा सुवासा स्थित आशुतोष मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट के रूप में काम करते थे। आरोप था कि तत्कालीन चिकित्साधिकारी डॉ. गौरव मुंदड़ा ने मेडिकल स्टोर संचालकों से कोमट्रिक्स और रूपीथर इंजेक्शन लिखने के बदले कमीशन मांगा था।

शिकायत में कहा गया कि डॉक्टर ने कथित तौर पर प्रति इंजेक्शन 10 से 14 रुपए कमीशन की मांग की थी।

पहले के इंजेक्शनों का हिसाब बताते हुए करीब 1500 रुपए देने को कहा गया। परिवादी ने रिश्वत देने के बजाय एसीबी में शिकायत की।

एसीबी ने सत्यापन के बाद की ट्रैप कार्रवाई

दस्तावेज के मुताबिक, 4 मई 2010 को शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने रिश्वत मांग का गोपनीय सत्यापन कराया। इसके बाद 7 मई 2010 को स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में ट्रैप कार्रवाई आयोजित की गई। एसीबी ने 1500 रुपए की कथित रिश्वत राशि से संबंधित कार्रवाई की और मौके से दस्तावेज तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रजिस्टर को जब्त किया।

जांच के दौरान आरोपी डॉक्टर ने अपने स्पष्टीकरण में रिश्वत लेने से इनकार किया था। उसका कहना था कि परिवादी ने बार-बार उकसाकर रुपए उसके रूमाल में रख दिए थे और उसने रूमाल सहित रुपए अपने सहकर्मी को बाहर फेंकने के लिए दिए थे। हालांकि, जांच अधिकारी के दस्तावेज में इस स्पष्टीकरण को बनावटी बताया गया है।

जांच में सहकर्मी की भूमिका प्रमाणित नहीं

एसीबी की जांच में तत्कालीन जीएनएम कंपाउंडर दीनदयाल मालव के खिलाफ अपराध में सहयोग करने, षड्यंत्र करने या लिप्त रहने की पुष्टि नहीं हुई। दस्तावेज के अनुसार, उनके विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 169 के तहत रिहाई के लिए अलग से आवेदन पेश करने का उल्लेख है।

जांच अधिकारी ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 तथा 13(1)(डी) और 13(2) के तहत अपराध प्रमाणित माना। इसके बाद राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की गई।

वर्ष 2011 में पेश की गई चार्जशीट

दस्तावेज के अनुसार, राजस्थान सरकार से 6 जुलाई 2011 को अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद 10 अगस्त 2011 को डॉ. गौरव मुंदड़ा के खिलाफ चार्जशीट संख्या 180/2011 तैयार की गई। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई के लिए न्यायालय से अनुरोध किया गया।

महत्वपूर्ण: उपलब्ध दस्तावेज में एसीबी की जांच और चार्जशीट का विवरण है, लेकिन मामले में न्यायालय के अंतिम फैसले की जानकारी नहीं है। इसलिए इसे दोषसिद्धि का मामला बताने के बजाय रिश्वत मांगने के आरोप और एसीबी की कार्रवाई के रूप में ही प्रस्तुत करना उचित होगा।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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