बूंदी, 21 सितंबर। अलगोजे की मधुर धुन, ढोलक की थाप और वीर तेजाजी महाराज के जयकारों के बीच सोमवार को जिलेभर में तेजा दशमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास से मनाया गया। गांवों और कस्बों में तेजाजी के थानकों पर मेले भरे। सुबह से दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। लोक कलाकारों ने तेजाजी की महिमा का गायन कर वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा।
लोकमान्यता में लाखेरी को तेजाजी की कर्मस्थली माना जाता है। इसी आस्था के चलते बूंदी जिले में तेजा दशमी पर विशेष आयोजन होते हैं। थानकों पर श्रद्धालु परिवार सहित पहुंचे और बाबा को भोग लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की।
शहर के बालचंद पाड़ा स्थित वीर तेजाजी महाराज मंदिर में परंपरागत मेले का आयोजन हुआ। मंदिर पुजारी जितेंद्र वर्मा ने बताया कि सुबह से ही दर्शनार्थियों का आना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने दिनभर दूध और कच्चे भोजन का भोग अर्पित किया। मंदिर परिसर में तेजाजी के लोकगीत गूंजते रहे।
दोपहर 12 बजे लोक आस्था के अनुसार घोड़ले में तेजाजी का भाव आने पर दस्सियां काटने की परंपरा निभाई गई। पुजारी के अनुसार, इस अनुष्ठान में वर्षभर में विषदंश से प्रभावित रहे लोग शामिल हुए। लोक कलाकारों के तेजाजी गायन और ढोलक की थाप के बीच घोड़ले ने पारंपरिक नृत्य किया। इसे देखने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे और घंटों तक आयोजन का हिस्सा बने रहे।
मेले में लोक कलाकार मोतीलाल सैनी, हेमंत खुवाड़ा, परशुराम गुर्जर और मेघराज सहित अन्य कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। अलगोजे और ढोलक के साथ तेजाजी की गाथाओं के गायन ने लोक परंपरा को जीवंत कर दिया। शाम को आरती के साथ मुख्य मेले का समापन हुआ।
