बूंदी। लोक देवता तेजाजी महाराज के मेले के तहत आयोजित हो रहे धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में बुधवार रात तेजाजी महाराज की झंडी (बिंदोरी) निकाली गई। झंडी में श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। जगह-जगह तेजाजी गायन हुआ और अलगोजों की धुनों से माहौल भक्तिमय हो गया।
तेजाजी महाराज की झंडी माताजी के चौक से प्रारंभ होकर मेघवाल मोहल्ला, चंदेरियों की गली, चंद्र गणेश जी, खांडे राय गणेश जी, बिजासन माता, चारभुजा नाथ और रामदेव जी मंदिर होते हुए खंडार वाले बाबा के मंदिर पहुंची। यहां देर रात तक तेजाजी गायन का दौर चलता रहा।
बिजासन माता चौक सहित मार्ग में आने वाले मंदिरों के प्रांगण में भी तेजाजी गायन हुआ। गायन सुनने के लिए आसपास के मोहल्लों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। तेजाजी गायन मंडली के मोती लाल सैनी, उदा लाल गुर्जर, हेमंत कुमार, गोपी लाल मेघवाल, महावीर मेघवाल, रामपाल मेघवाल सहित अन्य कलाकारों ने प्रस्तुतियां देकर समां बांधा। मोहल्ले की महिलाओं ने भी गीत प्रस्तुत कर आयोजन में सहभागिता निभाई।
परंपरा को जीवित रखने का प्रयास
मंदिर पुजारी जितेंद्र वर्मा ने बताया कि यह दूसरी झंडी थी, जबकि अगली झंडी नवमी को निकाली जाएगी। उन्होंने कहा कि झंडियां निकालने का उद्देश्य थानक की परंपरा को जीवित रखना और क्षेत्र को विषदंश से मुक्त रखने की मान्यता से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी दौर में भी क्षेत्रवासी अपनी लोक परंपराओं और संस्कृति को बचाए रखने में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।
खंडार वाले बाबा के थानक पर घोड़ले की देह में आए सगस जी महाराज ने श्रद्धालुओं से जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अनंत चतुर्दशी तक जीव-जंतुओं के घूमने का समय माना जाता है। रास्ते में सांप दिखाई देने पर उसे मारने के बजाय सुरक्षित रास्ता देने की अपील की गई। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति नीति के मार्ग पर चलेगा, भगवान उसके साथ रहेंगे।
आयोजन के दौरान किशन गुर्जर, मनीष गुर्जर, विष्णु, दीपक, अर्जुन, राकेश, मोहन, मनोज और जगदीश सहित अन्य लोगों ने व्यवस्थाएं संभालीं। महिलाओं में भूरी बाई, मोहिनी, सुनीता, सोनिया और कंचन बाई सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।
