बूंदी/कोटा, 19 सितंबर। बूंदी में सिजेरियन प्रसव के बाद दो प्रसूताओं की मृत्यु के मामलों को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। दोनों प्रकरणों की विस्तृत जांच के लिए राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, कोटा के स्तर पर चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति को दोनों मामलों से संबंधित चिकित्सकीय रिकॉर्ड और उपचार प्रक्रिया की जांच कर दो दिवस में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
पीएमओ लक्ष्मीनारायण मीना के अनुसार उपलब्ध चिकित्सकीय रिकॉर्ड में एक मामले में प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव यानी पोस्टपार्टम हैमरेज (PPH) की स्थिति सामने आई थी। रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए बैलून टैम्पोनाड, दवाइयों और रक्त आधान सहित आवश्यक उपचार किया गया। स्थिति नियंत्रित नहीं होने और उच्च स्तरीय उपचार की आवश्यकता को देखते हुए प्रसूता को उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किया गया।
दूसरे मामले में सिजेरियन प्रसव के बाद प्रसूता को सांस लेने में तकलीफ हुई। चिकित्सकीय परीक्षण और आवश्यक उपचार के बाद उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार रेफरल के बाद 17 सितंबर 2026 को कोटा में प्रसूता की मृत्यु हुई।
अधिकारियों के अनुसार दोनों मामलों में मृत्यु के अंतिम चिकित्सकीय कारणों का निर्धारण जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा।
वर्षा सेन की गर्भावस्था के दौरान हुई थीं चार एएनसी जांचें
पीएमओ मीना ने बताया कि सिलोर, बूंदी निवासी श्रीमती वर्षा सेन की गर्भावस्था के दौरान उपस्वास्थ्य केंद्र सिलोर पर नियमित एएनसी जांचें की गई थीं। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उनकी चार एएनसी जांचें 19 फरवरी, 16 अप्रैल, 25 जून और 20 अगस्त 2026 को हुई थीं।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार वर्षा सेन को 15 सितंबर 2026 को सामान्य चिकित्सालय, बूंदी में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकीय रिपोर्ट में उनकी गर्भावस्था करीब साढ़े आठ माह की बताई गई। बच्चे की स्थिति ट्रांसवर्स होने के कारण चिकित्सकों ने सिजेरियन प्रसव का निर्णय लिया।
सिजेरियन प्रसव के बाद उन्होंने करीब 2.800 किलोग्राम वजन की बच्ची को जन्म दिया। इसके बाद उन्हें पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में शिफ्ट किया गया और उनकी स्थिति की निगरानी की गई।
बाद में उनकी स्थिति में जटिलता उत्पन्न होने पर ऑन-ड्यूटी चिकित्सक ने परीक्षण कर आवश्यक उपचार किया। स्थिति को देखते हुए उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार रेफरल के बाद 17 सितंबर को कोटा में उनकी मृत्यु हो गई।
दूसरे मामले में प्रसव के बाद हुआ अत्यधिक रक्तस्राव
दूसरे प्रकरण में प्रसूता को 16 सितंबर 2026 को सामान्य चिकित्सालय, बूंदी में भर्ती किया गया था। प्रसव के बाद करीब 12:12 बजे उन्होंने 2.280 किलोग्राम वजन के बच्चे को जन्म दिया।
इसके बाद करीब 3:40 बजे प्रसूता में वेजाइनल ब्लीडिंग की स्थिति सामने आई। ऑन-ड्यूटी चिकित्सक ने तत्काल उपचार शुरू किया। पीपीएच के प्रबंधन के लिए बैलून टैम्पोनाड, दवाइयों और रक्त आधान का इस्तेमाल किया गया।
रिकॉर्ड के अनुसार रक्तस्राव नियंत्रित नहीं होने और अस्पताल में एचडीयू/आईसीयू की उपलब्धता नहीं होने के कारण प्रसूता को बेहतर उपचार के लिए उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किया गया। रेफरल से पहले उन्हें एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया।
चार सदस्यीय समिति करेगी दोनों मामलों की जांच
राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, कोटा के प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक की ओर से गठित जांच समिति में चार चिकित्सकों को शामिल किया गया है। समिति की संयोजक निश्चेतन विभाग की आचार्य डॉ. उषा दडिया हैं।
समिति में मेडिसिन विभाग के आचार्य डॉ. पंकज जैन, माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सह-आचार्य डॉ. राहुल अग्रवाल तथा प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की सह-आचार्य डॉ. आशिमा विजय सदस्य हैं।
समिति दोनों प्रकरणों में उपलब्ध चिकित्सकीय रिकॉर्ड, ऑपरेशन प्रक्रिया, उपचार, प्रसवोत्तर प्रबंधन और रेफरल प्रक्रिया की जांच करेगी। समिति को दो दिवस में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। इसके बाद आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
फिलहाल अधिकारियों ने दोनों प्रसूताओं की मृत्यु के अंतिम चिकित्सकीय कारणों को जांच पूरी होने तक निर्धारित नहीं माना है।
