बूंदी। सामान्य चिकित्सालय में सिजेरियन प्रसव के बाद दो प्रसूताओं की मृत्यु के मामलों की जांच के लिए राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, कोटा के स्तर पर चार सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति दोनों मामलों के चिकित्सकीय रिकॉर्ड, ऑपरेशन, प्रसवोत्तर उपचार और रेफरल प्रक्रिया की जांच कर दो दिन में रिपोर्ट देगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पीएमओ लक्ष्मीनारायण मीना के अनुसार, उपलब्ध रिकॉर्ड में एक प्रसूता को प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव और दूसरी को सांस लेने में तकलीफ होने की स्थिति सामने आई है। दोनों को उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किया गया था। मृत्यु के अंतिम चिकित्सकीय कारणों का निर्धारण जांच रिपोर्ट के आधार पर होगा।
वर्षा को 15 सितंबर को किया था भर्ती
पीएमओ ने बताया कि सिलोर निवासी वर्षा सेन को 15 सितंबर को बूंदी के सामान्य चिकित्सालय में भर्ती किया गया था। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार गर्भावस्था करीब साढ़े आठ माह की थी। गर्भ में बच्चे की स्थिति आड़ी होने के कारण सिजेरियन का निर्णय लिया गया। वर्षा ने करीब 2.800 किलोग्राम वजन की बच्ची को जन्म दिया। इसके बाद उन्हें पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में शिफ्ट किया गया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, बाद में जटिलता उत्पन्न होने पर चिकित्सक ने परीक्षण और उपचार किया तथा उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर कर दिया। रिकॉर्ड में 17 सितंबर को कोटा में उनकी मृत्यु होने का उल्लेख है। गर्भावस्था के दौरान उपस्वास्थ्य केंद्र सिलोर में उनकी चार प्रसवपूर्व जांचें भी दर्ज हैं।
रक्तस्राव नहीं थमा, अस्पताल में एचडीयू-आईसीयू भी उपलब्ध नहीं
दूसरे मामले में प्रसूता को 16 सितंबर को भर्ती किया गया था। पीएमओ के अनुसार, दोपहर करीब 12:12 बजे उन्होंने 2.280 किलोग्राम वजन के बच्चे को जन्म दिया। करीब 3:40 बजे रक्तस्राव होने पर उपचार शुरू किया गया। रक्तस्राव रोकने के लिए बैलून टैम्पोनाड, दवाइयों और रक्त आधान का सहारा लिया गया।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि रक्तस्राव नियंत्रित नहीं होने और एचडीयू-आईसीयू की उपलब्धता नहीं होने के कारण प्रसूता को उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किया गया। रेफरल से पहले एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया था।
ऑपरेशन से रेफरल तक की जांच
समिति की संयोजक निश्चेतन विभाग की आचार्य डॉ. उषा दडिया हैं। मेडिसिन विभाग के आचार्य डॉ. पंकज जैन, माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सह-आचार्य डॉ. राहुल अग्रवाल और प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की सह-आचार्य डॉ. आशिमा विजय सदस्य हैं। समिति की जांच से स्पष्ट होगा कि दोनों मामलों में जटिलताएं कब उत्पन्न हुईं, क्या उपचार दिया गया और रेफरल की प्रक्रिया किस तरह पूरी की गई।
