बूंदी। युवा लेखक एवं शायर शुभम गौतम अपनी लेखनी के माध्यम से साहित्य के क्षेत्र में अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनकी लेखन यात्रा को शुरुआती पहचान बूंदी की ऐतिहासिक पहचान और संस्कृति पर लिखी कविता ‘छोटी काशी बूंदी’ से मिली। सोशल मीडिया पर प्रकाशित इस रचना को पाठकों की सराहना मिली, जिसके बाद शुभम की लेखनी को व्यापक स्तर पर पहचान मिलने लगी।
इसके बाद उन्होंने प्रेम, भावनाओं, रिश्तों, सामाजिक सरोकारों और समकालीन विषयों को केंद्र में रखकर लगातार लेखन किया। उनकी रचनाओं में व्यक्तिगत अनुभवों के साथ-साथ समाज और आसपास के परिवेश से जुड़े विषयों की झलक भी देखने को मिलती है।
शायरी में सामाजिक सरोकारों को दी जगह
समय के साथ शुभम गौतम ने अपने लेखन का दायरा बढ़ाया और राजनीति तथा सामाजिक मुद्दों पर भी शायरी लिखना शुरू किया। अपनी रचनाओं के जरिए वे वर्तमान समय की घटनाओं, विभिन्न सामाजिक मुद्दों और जनभावनाओं को शब्द देने का प्रयास करते हैं। उनकी शायरी में भावनात्मक अभिव्यक्ति के साथ सामाजिक विषयों को लेकर संवेदनशील दृष्टिकोण दिखाई देता है।
अपने लेखन को लेकर शुभम गौतम कहते हैं, “कुछ पन्ने मैंने लिखे नहीं थे, मैंने उन्हें जिया था। बाद में उन्हीं एहसासों को शब्दों में उतारा। आज वही शब्द किताब के पन्नों के जरिए लोगों तक पहुंच रहे हैं। जो मैंने कभी महसूस किया था, अब शायद कोई और उसे पढ़कर महसूस करे, मेरे लिए यही सबसे खूबसूरत एहसास है।”
एसपी ने किया सम्मानित
लेखन के क्षेत्र में उनके कार्य और रचनात्मक योगदान के लिए बूंदी के पुलिस अधीक्षक अवनीश कुमार शर्मा ने शुभम गौतम को सम्मानित कर प्रमाण-पत्र प्रदान किया। सम्मान मिलने पर शुभम ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रोत्साहन उन्हें आगे भी बेहतर और सार्थक लेखन के लिए प्रेरित करेगा।
इस अवसर पर अनिल सैनी, जिगर सैनी, आशुतोष हरि सहित अन्य सहयोगी एवं गणमान्यजन मौजूद रहे।
