ADVERTISEMENT
ब्रेकिंग न्यूज़
• हाड़ौती अंचल: कोटा में नए रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट के लिए 120 करोड़ का अतिरिक्त बजट स्वीकृत • चुनाव आयोग ने आगामी निकाय चुनाव हेतु वोटर लिस्ट अपडेशन की समय सीमा बढ़ाई • राजस्थान बोर्ड परीक्षा 2026 की समय सारिणी घोषित, शिक्षा विभाग की बड़ी तैयारी • टी20 वर्ल्ड कप: भारतीय टीम ने दूसरे मुकाबले में भी दर्ज की धमाकेदार जीत
नागरिक अभिव्यक्ति
होम / शहर / लेख विस्तार
शहर

चंबल घड़ियाल सेंचुरी में अवैध बजरी खनन पर सख्ती, संवेदनशील इलाकों में होगी लगातार पेट्रोलिंग

अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार ने दिए निर्देश, जीपीएस से होगी वाहनों की निगरानी; बूंदी में 1 अप्रैल से अब तक 12 मामले दर्ज, 7 वाहन जब्त

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
अक्षर आकार:
चंबल घड़ियाल सेंचुरी में अवैध बजरी खनन पर सख्ती, संवेदनशील इलाकों में होगी लगातार पेट्रोलिंग
चंबल घड़ियाल सेंचुरी में अवैध बजरी खनन पर सख्ती, संवेदनशील इलाकों में होगी लगातार पेट्रोलिंग
ADVERTISEMENT
खबर शेयर करें:

कोटा/बूंदी, 14 अक्टूबर। राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध बजरी खनन और संकटग्रस्त जलीय जीवों पर मंडराते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने कार्रवाई तेज करने की तैयारी की है। अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण आनंद कुमार ने बुधवार को कोटा कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में कोटा और बूंदी क्षेत्र में अवैध खनन की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना सुनिश्चित करते हुए अवैध खनन और बजरी परिवहन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि अवैध खनन के संवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर वहां नियमित पेट्रोलिंग की जाए। बजरी परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों के मार्गों की पहचान कर मोबाइल चेक पोस्ट स्थापित किए जाएं। वन विभाग, पुलिस और खान विभाग संयुक्त रूप से गश्त कर कार्रवाई करें, ताकि चंबल घड़ियाल अभयारण्य के पारिस्थितिकी तंत्र और जलीय जीवों को नुकसान से बचाया जा सके।

मोबाइल चेक पोस्ट और सीसीटीवी से होगी निगरानी

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि संवेदनशील स्थानों पर मोबाइल चेक पोस्ट स्थापित कर अवैध खनन में प्रयुक्त वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई की जाए। निगरानी मजबूत करने के लिए चिह्नित क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और अवैध खनन वाले गांवों में मुखबिर तंत्र विकसित किया जाए।

उन्होंने पिछले वर्ष की गई कार्रवाई, वन विभाग, खान विभाग और पुलिस की संयुक्त पेट्रोलिंग तथा जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठकों की भी समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि अब तक की कार्रवाई की कमियों को दूर कर अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए।

बॉडी कैम, वायरलेस सेट और थर्मल ड्रोन से निगरानी

कोटा रेंज के आईजी हरेंद्र महावर ने बताया कि सीसीएफ कोटा और सीसीएफ वाइल्ड लाइफ कोटा के साथ 13 अक्टूबर को घघटाना, कोटसुवां और मानसगांव में निरीक्षण किया गया था।

रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के डीसीएफ अरुण कुमार ने प्रस्तुतीकरण में बताया कि 10 अक्टूबर को फील्ड डायरेक्टर के निर्देशन में डोलार, रोडगंज और नोताड़ा में फील्ड विजिट किया गया। संवेदनशील चेक पोस्ट पर बॉर्डर होमगार्ड तैनात किए गए हैं। निगरानी के लिए होमगार्ड को हथियार और बॉडी कैम उपलब्ध करवाए गए हैं।

इसके अतिरिक्त 14 वायरलेस सेट, एक थर्मल ड्रोन और अन्य उपकरणों की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने बताया कि बूंदी जिले के केशवरायपाटन, लाखेरी और इंद्रगढ़ थाना क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों के साथ वन एवं खान विभाग के अधिकारी चिह्नित क्षेत्रों में पेट्रोलिंग कर रहे हैं।

बूंदी और कोटा में कार्रवाई के आंकड़े

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से अब तक बूंदी जिले में अवैध बजरी खनन के खिलाफ विभिन्न विभागों ने कार्रवाई की है।

  • वन विभाग: रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 12 प्रकरण दर्ज कर 7 वाहन जब्त किए।
  • परिवहन विभाग: 148 मामलों में कार्रवाई करते हुए 28 वाहन जब्त किए।
  • पुलिस एवं खान विभाग: 25 मामलों में कार्रवाई कर 44 वाहन जब्त किए।

कोटा जिले में रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में वन विभाग ने 20 प्रकरण दर्ज कर 18 वाहन जब्त किए।

पुलिस विभाग ने 11 प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए 9 वाहन जब्त किए और 4 लोगों को गिरफ्तार किया। खान विभाग ने भी 8 प्रकरणों में कार्रवाई की।

वाहनों में जीपीएस अनिवार्य करने के निर्देश

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने भारी वाहनों, जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में जीपीएस सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाने तथा उसकी नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। इससे अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी जा सकेगी।

जिला रसद अधिकारी को निर्देश दिए गए कि बिना रजिस्ट्रेशन प्लेट वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों से ईंधन उपलब्ध नहीं होने की व्यवस्था की सख्ती से निगरानी करें। पेट्रोल पंपों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जांचकर ऐसे वाहनों की पहचान करने और आवश्यक कार्रवाई करने को भी कहा गया।

बजरी के विकल्प एम-सेण्ड को बढ़ावा देने पर जोर

बैठक में प्राकृतिक बजरी के विकल्प के रूप में एम-सेण्ड के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने आमजन में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए।

खान विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कोटा जिले में एम-सेण्ड की 9 और बूंदी जिले में 4 यूनिट संचालित हैं।

कोटा में दिसंबर तक 3 अतिरिक्त यूनिट शुरू होने की संभावना है। इससे एम-सेण्ड की उत्पादन क्षमता बढ़ने और निर्माण कार्यों में प्राकृतिक बजरी पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक पवन कुमार उपाध्याय, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन अरुण प्रसाद, संभागीय आयुक्त एवं कोटा जिला कलक्टर पीयूष समारिया, बूंदी जिला कलक्टर हरफूल सिंह यादव, कोटा शहर एसपी तेजस्विनी गौतम, कोटा ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर, बूंदी एसपी अवनीश कुमार शर्मा सहित वन, खान, परिवहन, पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

ADVERTISEMENT
लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

comment पाठकों की प्रतिक्रिया (Comments)

अपनी राय दर्ज करें: