नागरिक अभिव्यक्ति । बूंदी
चंबल नदी क्षेत्र और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में अवैध बजरी खनन की रोकथाम के लिए वन विभाग ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। गुरुवार को वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारियों के दल ने रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर-2 क्षेत्र और राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के अति संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने और निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ अधिकारी केशवरायपाटन रेंज के संवेदनशील क्षेत्र रोटेदा-मंडावरा पुलिया पहुंचे। यहां ड्रोन कैमरे की सहायता से रोटेदा, डोलर और मंडावरा क्षेत्र का जायजा लिया गया। ड्रोन सर्विलांस के जरिए संभावित खनन मार्गों, भौगोलिक स्थिति और मौजूदा निगरानी व्यवस्था का आकलन किया गया।
निरीक्षण के बाद मंडावरा रेंज कार्यालय में समीक्षा बैठक हुई। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि चंबल में अवैध खनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से जमीनी स्तर पर आ रही चुनौतियों की जानकारी लेकर तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग और विभागीय समन्वय को मजबूत करने के निर्देश दिए।
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के उप वन संरक्षक अरुण कुमार डी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना में चंबल अभयारण्य के संवेदनशील स्थानों पर निगरानी कैमरे लगाने का काम तेजी से चल रहा है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत 17 संवेदनशील पॉइंट्स पर 85 बॉर्डर होमगार्ड जवान तैनात किए गए हैं। गश्त करने वाले स्थायी वनकर्मियों को बॉडी वियर कैमरों से लैस किया गया है, ताकि कार्रवाई में पारदर्शिता बनी रहे। बजरी परिवहन के संभावित मार्गों पर बैरियर लगाए गए हैं और चौकियों के जरिए संदिग्ध वाहनों पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा फ्लाइंग टीमें भी लगातार गश्त कर रही हैं।
निरीक्षण दल में प्रधान मुख्य वन संरक्षक पवन कुमार उपाध्याय, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के.सी.ए. अरुण प्रसाद, संभागीय मुख्य वन संरक्षक आर.एन. मीणा, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक टी. मोहनराज, रामगढ़ विषधारी के क्षेत्र निदेशक सुगना राम जाट, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के उप वन संरक्षक एस. मुथु तथा रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के उप वन संरक्षक अरुण कुमार डी सहित कोटा-बूंदी के रेंजर और वनकर्मी मौजूद रहे।
