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नागिरक अभिव्यक्ति इन्वेस्टिगेशन | कोटा में मासूमों की खरीद-फरोख्त का सबसे बड़ा खुलासा, जांच शुरू

2 साल के बेटे को बेचना चाहता था पिता, मां की हिम्मत से हारा चाइल्ड ट्रैफिकिंग नेटवर्क

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विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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नागिरक अभिव्यक्ति इन्वेस्टिगेशन | कोटा में मासूमों की खरीद-फरोख्त का सबसे बड़ा खुलासा, जांच शुरू
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दो साल का मासूम लखन... उसे यह भी नहीं पता कि मां-बाप क्या होते हैं, रिश्ते क्या होते हैं और दुनिया कितनी बेरहम होती है। उसका अपना पिता राहुल उसे बेचने की तैयारी कर चुका था। खरीददार तलाश लिया था। सौदे की जमीन तैयार थी। बस कुछ कदम और बाकी थे कि मां बबिता (2021 से राहुल के साथ लिव-इन में रही) को इसकी भनक लग गई। उसने विरोध किया और यहीं से खुलने लगी उस खौफनाक दुनिया की परतें, जिसके पीछे बच्चों की खरीद-फरोख्त का एक संभावित नेटवर्क छिपे होने के संकेत मिले।

नागरिक अभिव्यक्ति की पड़ताल में सामने आया कि राहुल नशे का आदी रहा है। उसने अलग-अलग समय में तीन महिलाओं को लिव-इन पार्टनर बनाकर साथ रखा था। लखन के मामले की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने सिर्फ एक पिता की क्रूरता ही नहीं, बल्कि बच्चों की खरीद-फरोख्त के संभावित नेटवर्क की तस्वीर भी सामने रख दी। बाल कल्याण समिति की जांच में ऐसी कई जानकारियां सामने आई, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए। आरकेपुरम पुलिस ने मामले के मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर के अनुसार बच्चों को रेलवे स्टेशन, निजी नर्सिंग होम और कमजोर सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से निकालकर दूसरे लोगों तक पहुंचाया गया। कथित गोदनामे तैयार किए जाते, सादे स्टांप पेपर पर सहमति पत्र बनाए जाते और बच्चों को नई पहचान देकर दूसरे परिवारों तक पहुंचा दिया जाता। चौंकाने वाली बात यह थी कि बच्चों को सिर्फ परिवारों से दूर नहीं किया जाता था, बल्कि उनकी पहचान तक मिटा दी जाती थी।

(नोट: नाबालिगों की सुरक्षा, पहचान, गोपनियता जैसे कानूनों की पालना करने के लिए नाम बदले गए हैं। दस्तावेज, असल नाम हमारे पास सुरक्षित हैं।)

 

केस-1: मथुरा से आई सीता, CWC तक पहुंची, स्टांप पर बिकी

मासूम सीता इस नेटवर्क की बड़ी शिकार है। करीब 3-4 साल पहले राहुल खुद सीता को मथुरा (यूपी) के रेलवे स्टेशन से लाया था। 6 नवम्बर 2024 को उसे प्रेमनगर में रहने वाले एक व्यक्ति को स्टाम्प पर बेच दिया। रीना ने जुलाई 2024 को बालिका सीता की दादी बनकर उसे बाल कल्याण समिति के आश्रय में भी रखा था। एक माह बाद अगस्त 2024 में ही रीना ने खुद कोई कार्यवाही नहीं चाहने का आवेदन किया और सीता को वापस अपने साथ ले गई। सीडबल्यूसी ने भी जांच में इस बात को पकड़ लिया। सीडबल्यूसी के सतर्क होने के कारण ही यह बड़ा नेक्सेस उजागर हुआ।

केस-2: अमन को नर्सिंग होम से खरीदा, रिकॉर्ड से गायब

वर्ष 2019 में कोटा के एक निजी नर्सिंग होम में अविवाहित युवती ने बच्चे को जन्म दिया। सीडबल्यूसी की जांच में आया कि महिला स्टाफ ने युवती से अमन को खरीद लिया और बाद में उसे रीना के हवाले कर दिया गया। रीना ने उस बालक को अपनी बेटी को दे दिया। वो उसे आगरा ले गई। बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाया गया, आधार कार्ड और ही उसे स्कूल भेजा गया। उसका सरकारी रिकॉर्ड में अब तक कोई अस्तित्व नहीं है। मां, जाती, परिवार का कोई पता नहीं है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या भविष्य में उसे भी किसी सौदे का हिस्सा नहीं बनाया जाना था.?

 

पड़ताल : मां-बेटे दोनों गायब, पुलिस जांच चालू

मां-बेटे पिछले 2 माह से गायब है। राहुल वर्ष 2003-04 तक पुराने कोटा में रहता था। उसके बाद नए कोटा में शिफ्ट हो गया। जिस घर में वो रहा है, वो भी विवादित है। इधर, बाल कल्याण समिति ने बच्चों को उनके सर्वोत्तम हित और सुरक्षा को देखते हुए उन्हें संरक्षण में ले लिया है। पत्नी बबिता को भी सुरक्षा प्रदान करवाई गई है। वहीं, पुलिस दस्तावेजों, बयानों, टेक्निकल इनपुट, गोदनामों और बच्चों की वास्तविक पहचान से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। इसकी भी जांच जारी है कि अब तक कितने बच्चों को अवैध रूप से इधर-उधर किया गया और कौन-कौन लोग इस गिरोह से जुड़े हुए हैं।

 

मासूमों की पहचान तक मिटा दी

पड़ताल में सामने आया कि इस नेटवर्क का सबसे भयावह पहलू सिर्फ बच्चों को अवैध रूप से इधर-उधर करना नहीं था, बल्कि उनकी पहचान तक मिटा देना था। जांच में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बनवाया गया, आधार कार्ड और ही उन्हें स्कूल भेजा गया। यानी कई बच्चे वर्षों से सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं है। उनकी पिछली जिंदगी, असली नाम और वास्तविक माता-पिता तक की जानकारी मिट चुकी है। भविष्य में उनकी पहचान स्थापित करना और उनके परिवारों से जोड़ना मुश्किल होगा। मामले में केस दर्ज कर पुलिस अब दस्तावेजों, बयानों, कथित गोदनामों, टेक्निकल इनपुट और बच्चों की वास्तविक पहचान से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितने बच्चों को इस नेटवर्क के जरिए इधर-उधर किया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

 

मुकदमा हमारे थाने में दर्ज है, लेकिन जांच महिला थाना पुलिस कर रही हैं। वो ही बेहतर बता पाएंगे। हमारे पास चालान के समय फाइल आएगी।
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महेंद्र मारू, सीआई आरकेपुरम
मामले में जांच की जा रही हैं। अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस संबंध में एक मुकदमा जीआरपी थाने में भी दर्ज है। जांच के बाद जल्द गिरफ्तारी होगी।
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बृजबाला शर्मा, सीआई महिला थाना
हां, मुकदमा हमने दर्ज करवाया था। यह बहुत संवेदनशील मामला है क्योंकि नवजात बालकों की तस्करी की जा रही हैं। नाबालिग बालक-बालिकाओं के भविष्य और हितों से खिलवाड़ हो रहा हैं। हम पुलिस जांच और गिरफ्तारी का इंतजार कर रहे हैं।
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राजेंद्र सिंह राठौड़, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति कोटा

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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