नागरिक अभिव्यक्ति @ नई दिल्ली
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) की अगली किस्त पर टिकी हैं। जुलाई 2026 से प्रभावी होने वाली बढ़ोतरी को लेकर 3 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसा होने पर कर्मचारियों का महंगाई भत्ता मौजूदा 60 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत हो सकता है। हालांकि, नई दर को लेकर आधिकारिक मंजूरी की पुष्टि नहीं होने के कारण इसे अभी संभावित बढ़ोतरी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
इससे पहले केंद्र सरकार ने 18 अप्रैल 2026 को डीए और डीआर में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी मंजूर की थी। इसके बाद महंगाई भत्ता मूल वेतन का 60 प्रतिशत हो गया था। सरकारी घोषणा के अनुसार, उस फैसले से करीब 50.46 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 68.27 लाख पेंशनर्स लाभान्वित होने थे।
बेसिक पे के हिसाब से समझें संभावित बढ़ोतरी
महंगाई भत्ते की दर मूल वेतन के प्रतिशत के आधार पर तय होती है। यदि डीए में 3 प्रतिशत की वृद्धि मंजूर होती है, तो कर्मचारी के वेतन में होने वाला अतिरिक्त भुगतान उसकी बेसिक पे पर निर्भर करेगा।
18,000 रुपये मूल वेतन वाले कर्मचारी को मौजूदा 60 प्रतिशत दर पर 10,800 रुपये डीए मिलता है। दर 63 प्रतिशत होने पर यह राशि 11,340 रुपये हो जाएगी। यानी हर महीने 540 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।
इसी तरह, 56,100 रुपये मूल वेतन वाले कर्मचारी का डीए 33,660 रुपये से बढ़कर 35,343 रुपये हो सकता है। इस स्थिति में मासिक अंतर 1,683 रुपये होगा। ये गणनाएं प्रस्तावित 3 प्रतिशत वृद्धि पर आधारित हैं, न कि किसी मंजूर आदेश पर।
मंजूरी मिली तो एरियर का भी लाभ
केंद्र सरकार यदि नई दर को 1 जुलाई 2026 से प्रभावी करने की मंजूरी देती है, तो पात्र कर्मचारियों और पेंशनर्स को जुलाई से लागू अंतर की बकाया राशि मिलने का प्रावधान हो सकता है। भुगतान की वास्तविक राशि और समय सरकार के आदेश तथा संबंधित वेतन अवधि पर निर्भर करेगा।
पेंशनर्स को भी मूल पेंशन पर महंगाई राहत (डीआर) का लाभ मिलता है। डीए और डीआर की दरों में संशोधन का उद्देश्य बढ़ती कीमतों के असर को कम करने में मदद करना है।
साल में दो बार होती है समीक्षा
केंद्र सरकार सामान्यतः जनवरी और जुलाई से प्रभावी होने वाली दो किस्तों में महंगाई भत्ते की समीक्षा करती है। इसकी गणना में औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी एआईसीपीआई-आईडब्ल्यू के आंकड़ों की अहम भूमिका रहती है। अंतिम दर सरकार की औपचारिक मंजूरी और आदेश के बाद ही लागू होती है।
फिलहाल कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए अहम सवाल यही है कि जुलाई 2026 की लंबित किस्त पर फैसला कब आता है। तीन प्रतिशत वृद्धि की संभावना चर्चा में जरूर है, लेकिन आधिकारिक आदेश जारी होने तक 63 प्रतिशत डीए को निश्चित मानना उचित नहीं होगा।
