बूंदी। विद्यालयों के पुस्तकालयों को बच्चों की रुचि के अनुरूप आकर्षक बनाने और संवाद के जरिए उन्हें बाल साहित्य से जोड़ने पर केंद्रित दो दिवसीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण गुरुवार को संपन्न हुआ। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) बूंदी में आयोजित प्रशिक्षण में 26 पुस्तकालयाध्यक्षों एवं प्रभारियों ने भाग लिया।
समापन पर डब्ल्यूई प्रभाग अध्यक्ष जेपी त्रिपाठी ने कहा कि वर्तमान समय में पुस्तकालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। पारंपरिक पुस्तकालयों को बदलती जरूरतों के अनुसार नया स्वरूप देना होगा। संचालन के ऐसे तरीके अपनाने होंगे, जिनसे बच्चे पुस्तकालय की ओर आकर्षित हों और उपलब्ध साहित्य का उपयोग करें।
चित्रकला व्याख्याता विवेक उतरेजा ने कहा कि चित्रांकन के माध्यम से पुस्तकालयों को बच्चों के लिए आकर्षक बनाया जा सकता है। प्रशिक्षण में बच्चों से संवाद कर उनकी रुचि समझने और उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करने पर भी जोर दिया गया।
स्मार्ट बोर्ड से समझाए संचालन के तरीके
राज्य संदर्भ व्यक्ति मनीष कुमार नेकेला ने स्मार्ट बोर्ड की सहायता से प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। इस दौरान पारंपरिक और नए पुस्तकालयों के स्वरूप, बाल साहित्य के उपयोग तथा बच्चों की भागीदारी बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की गई।
डाइट व्याख्याता प्रदीप कुमार शर्मा, पुस्तकालयाध्यक्षों एवं प्रभारियों में सरोज जोशी, मधुबाला अग्रवाल, एकता जांगिड़, सुशीला मीणा, अभय राव, चंपालाल, प्रेमचंद सैनी, गोविंद कुमार शर्मा, मानसिंह मीणा, देवेंद्र मालव, नरेंद्र कुमार टेलर और मनीष जडेजा ने भी विचार व्यक्त किए।
