नागरिक अभिव्यक्ति . कोटा
चंबल नदी और कोटा शहर से गुजर रही दाईं व बाईं मुख्य नहरें जब भी उफान पर होती हैं या कोई हादसा होता है, तब नगर निगम की रेस्क्यू टीम के सदस्य विष्णु श्रृंगी वहां संकटमोचक बनकर खड़े होते हैं। पिछले ढाई दशकों से वे लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान हथेली पर रखकर उफनती लहरों और अंधेरे गहरे पानी में उतर रहे हैं। वे न सिर्फ जीवित लोगों को बचा रहे हैं, बल्कि हादसों के शिकार हुए मृतकों के शवों को भी पूरी संवेदनशीलता के साथ निकाल रहे हैं। वे अब तक चंबल नदी, कोटा बैराज और संभाग की नहरों में 500 से अधिक रेस्क्यू ऑपरेशनों का नेतृत्व कर चुके हैं, जिनमें 1000 से अधिक लोगों की जान बचा चुके हैं और 2500 से अधिक शवों को पानी से बाहर निकाल चुके हैं। इन सबमें उनकी उंगलियां कट चुकी हैं, एलर्जी हो चुकी है और शरीर पर घाव हो गए हैं। सुनने की क्षमता में भी बदलाव आ गया, लेकिन वे अपनी सेवा से पीछे नहीं हटे। कोटा संभाग के अलावा पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश की सीमाओं तक जब भी कोई बड़ा जल हादसा होता है, प्रशासन सबसे पहले विष्णु श्रृंगी को याद करता है। इस निस्वार्थ और साहसिक कार्य के लिए उन्हें राज्य स्तर और जिला स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है।
