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हाड़ौती की नई पहचान | कोटा-बूंदी ग्रीनफिल्ड एयरपोर्ट के शिलान्यास के बाद 15 % काम पूरा, 2027 तक आमजन को मिलेगी सुविधाएं

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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हाड़ौती की नई पहचान | कोटा-बूंदी ग्रीनफिल्ड एयरपोर्ट के शिलान्यास के बाद 15 % काम पूरा, 2027 तक आमजन को मिलेगी सुविधाएं
हाड़ौती की नई पहचान | कोटा-बूंदी ग्रीनफिल्ड एयरपोर्ट के शिलान्यास के बाद 15 % काम पूरा, 2027 तक आमजन को मिलेगी सुविधाएं
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कोटा संभाग प्रकृति, उद्योग, शिक्षा और संस्कृति का एक ऐसा अनूठा संगम है, जो विरल ही देखने को मिलता है। बतौर संभागीय आयुक्त, जब मैं इस क्षेत्र की संभावनाओं को टटोलता हूँ, तो मुझे यहाँ 'जल, जंगल और जमीन' का एक अद्भुत तालमेल नजर आता है। यह क्षेत्र जितना अपनी शैक्षणिक और औद्योगिक पहचान के लिए जाना जाता है, उतना ही इसमें पर्यटन और कृषि के क्षेत्र में असीम संभावनाएं छिपी हैं।

 वर्तमान में मेरे पास संभागीय आयुक्त के साथ केडीए अध्यक्ष और नगर निगम के प्रशासक का भी प्रभार है। शहर के सौंदर्यीकरण, नालों की सफाई, मैनहोल कवर लगाने और ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए हम नियमित रूप से संयुक्त बैठकें कर रहे हैं ताकि विभागों के बीच समन्वय की कोई कमी रहे। चंबल नदी के सौंदर्यीकरण, गराडिया महादेव मंदिर के विकास, किशोर सागर तालाब के सौंदर्यीकरण  और कोटा के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मथुराधीश मंदिर को विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है।

एयरपोर्ट : सवाई माधोपुर-उदयपुर से दूरी सिर्फ 2 घंटे

ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट का निर्माण हमारे लिए एक बहुत बड़ा माइलस्टोन (मील का पत्थर) साबित होने जा रहा है। लगभग 1500 करोड़ के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का शिलान्यास हो चुका है। वर्तमान में 15% भौतिक प्रगति हासिल की जा चुकी है। 2027 की निर्धारित समय-सीमा तक इसे पूरा करेंगे। एयरपोर्ट बड़े पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित होगा। हम लिंक रोड्स का ऐसा जाल तैयार कर रहे हैं, जिससे सवाई माधोपुर (रणथंभौर) और उदयपुर संभाग के पर्यटन क्षेत्रों की दूरी एयरपोर्ट से महज डेढ़ से दो घंटे की रह जाए।

 

टाइगर रिजर्व : रणथंभौर के दबाव को बांटेगा कोटा

कोटा संभाग में वन्यजीव पर्यटन का एक नया युग शुरू हो चुका है। मुकुंदरा टाइगर प्रोजेक्ट और रामगढ़ विषधारी में टाइगर्स को लाया जा चुका है। सबसे सुखद बात यह है कि अब यहाँ वन्यजीवों की साइटिंग (दिखना) भी शुरू हो गई है। रणथंभौर पर पर्यटकों का जो भारी दबाव है, उसे कम करने में कोटा संभाग की ये परियोजनाएं बड़ी भूमिका निभाएंगी। चंबल सफारी के जरिए गराडिया महादेव मंदिर होते हुए मुकुंदरा सफारी को जोड़ने वाला एक बेहतरीन इकोसिस्टम लिंक तैयार हो रहा है। इसके साथ ही, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों से आने वाले समय में चंबल नदी में एक क्रूज चलाने की भी योजना है।

एग्रो प्रोसेसिंग: बासमती, लहसुन और धनिया हमारी ताकत

कोटा संभाग कृषि के मामले में बेहद समृद्ध है। यहाँ धनिया, लहसुन और धान (चावल) की बंपर पैदावार होती है। किसानों की सुविधा के लिए भामाशाह मंडी का विस्तार नेशनल हाईवे तक किया जा रहा है। वर्तमान में कोटा का बेहतरीन बासमती चावल पंजाब जाता है और वहां के नाम से बिकता है। हाल ही में मैंने लघु और मध्यम उद्योगों के उद्यमियों के साथ बैठक की है। हमारा प्रयास है कि कोटा के चावल को पंजाब भेजने के बजाय खुद का ब्रांड नेम दिया जाए और इसकी जीआई टैग कराई जाए। इसकी सारी तैयारी पूरी है।

 

चंबल रिवर : पर्यटकों का फुटफॉल बढ़ाने का प्रयास

चंबल रिवर फ्रंट देश की एक उत्कृष्ट धरोहर के रूप में उभरकर सामने आया है। अब हमारा मुख्य फोकस यहाँ लगातार पर्यटकों की आवाजाही (फुटफॉल) को बनाए रखना है। इसके लिए हम नाइट टूरिज्म और नाइट मार्केट विकसित करने का एक बड़ा प्लान तैयार कर रहे हैं। रिवर फ्रंट पर स्थित लगभग 155 दुकानों को आउटसोर्स या लीज पर दिया जाएगा। इन दुकानों के माध्यम से राजस्थान की समृद्ध परंपरा, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि रात के समय भी लोग यहाँ घूम सकें और खरीदारी कर सकें।

 

 

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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