फिल्म समीक्षा
नागरिक अभिव्यक्ति @ कोटा
प्रियदर्शन की ‘हैवान’ कागज पर एक मजबूत क्राइम-थ्रिलर लगती है—दृष्टिहीन नायक, रहस्यमयी किलर, हत्या का आरोप और जान बचाने की दौड़। लेकिन पर्दे पर यह कहानी उतनी ही सुस्त पड़ जाती है, जितनी तेज इसे होना चाहिए था। फिल्म प्रियदर्शन की मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का हिंदी रीमेक है, मगर हिंदी संस्करण में वही असर पैदा नहीं हो पाता। श्याम यानी सैफ अली खान दृष्टिहीन है, लेकिन उसकी सुनने और सूंघने की क्षमता बेहद तेज है। रिटायर्ड जज प्रधान की हत्या के बाद शक उसी पर आता है, जबकि असली खतरा परशुराम यानी अक्षय कुमार है, जो जज की बेटी नंदिनी के पीछे पड़ा है। यहीं से कहानी में रोमांच पैदा होना चाहिए, मगर फिल्म लंबी भूमिका और धीमी रफ्तार में उलझ जाती है। पहला हाफ सबसे ज्यादा निराश करता है। कहानी बार-बार ठहरती है और थ्रिलर का तनाव बनने में काफी देर लगती है। अक्षय कुमार का शुरुआती हिस्से में बेहद सीमित स्क्रीन टाइम भी खटकता है। जब उनका किरदार खुलकर सामने आता है तो फिल्म कुछ देर के लिए गति पकड़ती है, लेकिन यह असर टिकता नहीं। सबसे बड़ी कमजोरी पटकथा के लॉजिक हैं। किरदार कई ऐसे फैसले लेते हैं जो दर्शक को कहानी में डूबने के बजाय सवाल पूछने पर मजबूर करते हैं। थ्रिलर में रहस्य कहानी के भीतर होना चाहिए, पटकथा की कमियों में नहीं। सैफ का किरदार लंबा है, लेकिन यादगार दृश्य कम हैं। अक्षय के किरदार में खौफ पैदा करने की गुंजाइश थी, मगर उसे पर्याप्त गहराई नहीं मिली। 2 घंटे 44 मिनट की अवधि भी फिल्म को भारी बनाती है।
छह दिन में भारत में सिर्फ 9.30 करोड़ कमाई
बड़े सितारों के बावजूद ‘हैवान’ टिकट खिड़की पर भी रफ्तार नहीं पकड़ सकी। फिल्म ने 11 सितंबर को करीब 3 करोड़ रुपए की नेट ओपनिंग की। शनिवार को 2.50 करोड़ और रविवार को 1.85 करोड़ रुपए आए। इस तरह पहले वीकेंड की भारत में नेट कमाई महज 7.35 करोड़ रुपए रही। सोमवार और मंगलवार को 70-70 लाख तथा बुधवार को करीब 55 लाख रुपए का कारोबार हुआ। छह दिनों में फिल्म का भारत में नेट कलेक्शन करीब 9.30 करोड़ और वर्ल्डवाइड ग्रॉस कारोबार करीब 14.23 करोड़ रुपए रहा। 17 सितंबर दोपहर तक उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों में भारत का नेट कलेक्शन करीब 9.49 करोड़ रुपए तक पहुंचा था, हालांकि दिन के अंतिम आंकड़े आना बाकी थे। विभिन्न ट्रेड रिपोर्टों में फिल्म की लागत करीब 120 से 130 करोड़ रुपए बताई जा रही है। ऐसे में शुरुआती सप्ताह का कारोबार फिल्म के बजट के मुकाबले काफी छोटा है।
