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हाइवे बने ड्रग सिंडिकेट के साइलेंट कॉरिडोर, 612 तस्करों को दबोचकर पुलिस ने तोड़ा नेटवर्क

ग्रामीण पुलिस के हेल्पलाइन नंबर से मिल रही मदद

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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हाइवे बने ड्रग सिंडिकेट के साइलेंट कॉरिडोर, 612 तस्करों को दबोचकर पुलिस ने तोड़ा नेटवर्क
हाइवे बने ड्रग सिंडिकेट के साइलेंट कॉरिडोर, 612 तस्करों को दबोचकर पुलिस ने तोड़ा नेटवर्क
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नागरिक अभिव्यक्ति. कोटा

कोटा जिले से गुजरने वाले नेशनल हाईवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे और उनसे जुड़े लिंक रोड अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करों के लिए प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर बन चुके हैं। मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र से आने वाली अफीम, डोडा चूरा, गांजा और अन्य मादक पदार्थों की खेप इन्हीं मार्गों के जरिए पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी राजस्थान तक पहुंचाई जा रही है। वर्ष 2024 से जून 2026 के बीच इन मार्गों पर लगातार एनडीपीएस प्रकरण दर्ज होना इस बात का संकेत है कि कोटा ग्रामीण क्षेत्र अब केवल कानून-व्यवस्था की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ सबसे महत्वपूर्ण मोर्चों में से एक बन चुकाहै। इसी चुनौती से निपटने के लिए आईपीएस सुजीत शंकर के नेतृत्व में कोटा ग्रामीण पुलिस ने रणनीति में बड़ा बदलाव किया। तकनीकी निगरानी, खुफिया सूचना तंत्र, लगातार नाकाबंदी,अंतरराज्यीय समन्वय और मुखबिर नेटवर्क को मजबूत करते हुए पुलिस ने ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। इसका परिणाम यह रहा कि केवल पिछले 6 माह में ही कमर्शियल क्वांटिटी के 25 प्रकरण दर्ज किए गए। कार्रवाई के दौरान हजारों किलो डोडा चूरा, गांजा और अन्य मादक पदार्थ जब्त किए गए तथा कई अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार कर उनके नेटवर्क को बड़ा झटका दिया हैं। वर्ष 2026 में जुलाई तक पुलिस ने 107 एनडीपीएस प्रकरण दर्ज कर 139 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस अवधि में 7.63 करोड़ के मादक पदार्थ जब्त किएगए। इसके अलावा 36 मध्यम मात्रा, 34 अल्प मात्रा तथा 12 स्मैक पीने के उपकरण से जुड़े प्रकरण भी दर्ज किए गए हैं। कमर्शियल मात्रा के मामलों में आई तेजी इस बात का संकेत है कि कार्रवाई अब छोटे तस्करों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बड़े ड्रग सिंडिकेट और उनकी सप्लाई चेन तक पहुंच चुकी है।

3 सालों में एनडीपीएस के 375 केस दर्ज

कोटा ग्रामीण पुलिस ने बीते तीन वर्षों एनडीपीएस एक्ट के तहत कुल 375 प्रकरण दर्ज कर 612 तस्करों को गिरफ्तार किया। इस दौरान 20.88 करोड़ के मादक पदार्थ और तस्करी में प्रयुक्त 140 वाहनों को जब्त किया गया। जिसमें 13.225 किलो अफीम, 1178.818 किलो गांजा, 8029.542 किलो डोडा चूरा, 1032.37 ग्राम स्मैक, 252.157 ग्राम चरस तथा 23.64 ग्राम एमडी बरामद की। आंकड़े बताते हैं कि पुलिस अब केवल छोटे स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे ड्रग नेटवर्क और उसकी सप्लाई चेन पर फोकस कर रही है। गौरतलब है कि कोटा ग्रामीण क्षेत्र न तो अफीम, डोडा चूरा या अन्य मादक पदार्थों का प्रमुख उत्पादन क्षेत्र है और न ही यहां इनकी बड़ी खपत होती है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश से सटी सीमा, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण संपर्क मार्गों का विस्तृत नेटवर्क तस्करों के लिए आसान ट्रांजिट रूट बन गया। पारंपरिक मार्गों पर पुलिस की सख्ती बढ़ने के बाद तस्करों ने लिंक रोड और ग्रामीण रास्तों का इस्तेमाल शुरू किया, जिससे पुलिस के सामने नई चुनौती खड़ी हुई।

जिला कोटा ग्रामीण पुलिस की परिवाद हेल्पलाइन 8764520202 आमजन के लिए प्रभावी साबित हो रही है। प्राप्त शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। पहले फोटो में लाेकसभा स्पीकर ओम बिला, तत्कालीन आईजी राजेन्द्र गोयल (रिटायर्ड), एसपी सुजीत शंकर, शहर एसपी तेजस्वनी गौतम। दूसरे फोटो में एसपी सुजीत शंकर अपनी पूरी टीम के साथ। (फाइल फोटो)

 

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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