नागरिक अभिव्यक्ति @ बूंदी
पंचायत चुनाव में जनप्रतिनिधि की शैक्षणिक योग्यता ज्यादा जरूरी है या जनता का विश्वास और अनुभव? इस सवाल पर राजकीय महाविद्यालय हिंडोली में विद्यार्थियों के बीच रोचक बहस हुई। पंचायत चुनाव मतदाता जागरूकता अभियान के तहत आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पक्ष और विपक्ष में अपने तर्क रखे। किसी ने शिक्षित सरपंच को डिजिटल पंचायत और योजनाओं के बेहतर संचालन के लिए जरूरी बताया तो किसी ने कहा कि गांव का विकास डिग्री से नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि की नीयत, अनुभव और जनविश्वास से होता है।
प्राचार्य डॉ. प्रतिभा किरण की अध्यक्षता में आयोजित प्रतियोगिता में ‘क्या पंचायत चुनाव में शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य होनी चाहिए?’ विषय पर विद्यार्थियों ने विचार रखे। पक्ष में बोलने वाले विद्यार्थियों ने कहा कि शिक्षित सरपंच बजट प्रबंधन, डिजिटल पंचायत और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को बेहतर तरीके से समझ सकता है। वहीं विपक्ष में विद्यार्थियों ने तर्क दिया कि जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी योग्यता जनता का विश्वास और उसकी समस्याओं को समझने की क्षमता है। इसके लिए केवल शैक्षणिक डिग्री को आधार नहीं बनाया जा सकता। बहस के दौरान बाड़मेर की सात बार निर्विरोध सरपंच चुनी गई भीखी देवी का उदाहरण भी दिया गया।
वाद-विवाद में सुनील सैनी प्रथम
कार्यक्रम संयोजक डॉ. शशिकांत बैरवा ने बताया कि वाद-विवाद प्रतियोगिता में सुनील सैनी ने प्रथम, नवराज सिंह ने द्वितीय और हरीश सैनी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। आशु भाषण प्रतियोगिता में नीलू कुमारी वर्मा प्रथम, राधिका कुमारी द्वितीय और रक्षा कुमावत तृतीय रहीं। निर्णायक मंडल में डॉ. पीतांबर दत्त शर्मा और डॉ. रमेश चंद सैनी शामिल रहे।
प्राचार्य डॉ. प्रतिभा किरण ने विजेताओं को बधाई देते हुए विद्यार्थियों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शत-प्रतिशत मतदान के लिए युवाओं को स्वयं जागरूक होने के साथ आमजन को भी मतदान के प्रति प्रेरित करना चाहिए। कार्यक्रम में डॉ. बंटेश कुमार मीणा, डॉ. रेणु बाला, राजेंद्र कुमावत, भुवनेश कुमार, बनवारी लाल गुर्जर सहित महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
