बूंदी में एक मां-बेटे द्वारा गणेश बाग स्थित मकान में देह व्यापार का संगठित सिंडिकेट चलाया जा रहा था। हर सौदे का हिसाब व्हाट्सएप पर दर्ज होता था और वसूली पेटीएम के जरिए की जाती थी। नेटवर्क राजस्थान, गुजरात और पश्चिम बंगाल तक फैला था, जहां से युवतियां बुलाई जाती थीं। पुलिस ने जब बोगस ग्राहक भेजकर दबिश दी तो 7 कमरों में संचालित इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो गया। कार्रवाई में 15 आरोपी गिरफ्तार किए गए, जबकि 7 युवतियों को दस्तयाब किया गया। मौके से 2.47 लाख रुपए नकद, 8 वाहन, 5 पेटीएम स्कैनर, 4 मोबाइल और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई।
एफआईआर के अनुसार पुलिस को सूचना मिली कि गणेश बाग स्थित एक मकान में मां-बेटे द्वारा बाहर से युवतियां बुलाकर देह व्यापार कराया जा रहा है। सूचना की तस्दीक करने के बाद एएसआई को बोगस ग्राहक बनाकर 500-500 रुपए के दो हस्ताक्षरित नोट दिए गए। जैसे ही संचालकों ने रुपए लेकर युवती उपलब्ध कराने की सहमति दी, बाहर इंतजार कर रही पुलिस टीम ने मकान पर दबिश दे दी। मकान के अंदर का दृश्य पुलिस के लिए भी चौंकाने वाला था। नीचे बरामदे में 5 युवक अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, जबकि 7 अलग-अलग कमरों में ग्राहक और युवतियां आपत्तिजनक हालत में मिले। पुलिस ने सभी कमरों की वीडियोग्राफी कर तलाशी ली। पुलिस ने मां-बेटे और दलाल समेत कुल 15 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस टीम में दबलाना सीआई प्रिया व्यास, सदर सीआई भंवर सिंह, एएसआई रामसिंह, रोशनलाल, प्रहलाद, फूलचंद और अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।
ऐसे चलता था हाईटेक नेटवर्क
एफआईआर के अनुसार यह पूरा नेटवर्क किसी कॉर्पोरेट कंपनी की तरह व्यवस्थित तरीके से चल रहा था। मुख्य आरोपी के मोबाइल में व्हाट्सएप चैट पर प्रत्येक युवती के जरिए हुए सौदों का क्रमवार हिसाब दर्ज मिला। किस ग्राहक को कौन-सी युवती भेजी गई, कितनी रकम मिली और किसे कितना भुगतान किया गया, इसका पूरा रिकॉर्ड मोबाइल में था। मौके से 5 पेटीएम स्कैनर भी मिले। ग्राहकों से प्रति चक्कर 1000 रुपए वसूले जाते। इसमें से 500 रुपए संचालक और दलाल अपने पास रखते, जबकि 500 रुपए युवतियों को दिए जाते।
मौके पर राजस्थान, गुजरात और पश्चिम बंगाल की युवतियां मिली हैं। अब यह जांच की जा रही है कि उन्हें बूंदी तक कौन लेकर आया, ग्राहकों की व्यवस्था कौन करता था और इस नेटवर्क से और कौन-कौन जुड़े हैं। मुख्य आरोपी के खिलाफ पहले भी ऐसे मामले दर्ज हैं। मामले की आगे की जांच तालेड़ा डीएसपी को सौंपी गई है।
- अनिल जोशी, डीएसपी
