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पुलिसिंग का प्रभावी चेहरा IPS सुजीत शंकर, कोटा ग्रामीण बना मॉडल जिला

नेत़ृत्व | 1.5 साल में तोड़ा 'ड्रग सिंडिकेट', 5.12 करोड़ की अवैध संपत्तियों पर चलाया 'पीला पंजा'

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पुलिसिंग का प्रभावी चेहरा IPS सुजीत शंकर, कोटा ग्रामीण बना मॉडल जिला
पुलिसिंग का प्रभावी चेहरा IPS सुजीत शंकर, कोटा ग्रामीण बना मॉडल जिला
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राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमाओं से सटे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और दो राष्ट्रीय राजमार्गों से गुजरने वाला कोटा ग्रामीण पुलिस जिला आज प्रदेश के चुनौतीपूर्ण पुलिस जिलों में गिना जाता है। करीब 19 लाख की आबादी, 202 ग्राम पंचायतें और अंतरराज्यीय अपराध की चुनौतियों के बीच आईपीएस सुजीत शंकर आधुनिक और तकनीक आधारित पुलिसिंग के जरिए अलग कार्यशैली विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं।

राजस्थान और मध्य प्रदेश के 7 जिलों की सीमाओं से जुड़े कोटा ग्रामीण पुलिस जिले में 202 ग्राम पंचायतें, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग-52 27 और करीब 19 लाख की आबादी कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौती हैं। ऐसे संवेदनशील जिले की कमान वर्ष 2020 बैच के युवा आईपीएस अधिकारी सुजीत शंकर के हाथों में है। आईआईईएसटी, कोलकाता से इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर भारतीय पुलिस सेवा में आए सुजीत शंकर आधुनिक और तकनीक आधारित पुलिसिंग पर विशेष जोर दे रहे हैं। 'नागरिक अभिव्यक्ति' से विशेष बातचीत में उन्होंने बदलते अपराध, हाईवे सुरक्षा, सामुदायिक पुलिसिंग और अपनी कार्यशैली पर खुलकर चर्चा की।

Q|  आपका कार्यकाल अब डेढ़ साल का हो चुका है, सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?

जवाब: मेरी सबसे पहली चुनौती जिले का विशाल भौगोलिक विस्तार था क्योंेकि मैं परिवादियों को सुनना चाहता था और वे िजला मुख्यालय से काफी दूर थे। दूसरा चेलेंज, किसी भी सुदूर गांव में घटना होने पर पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम कम करना था। इसके लिए मैं खुद थाने-थाने जाकर परिवादियों से सीधा संवाद कर रहा हूं। हेल्पलाइन की तर्ज पर व्हाट्सएप नंबर से िशकायतें दूर कर रहे हैं। इस नंबर को मैं खुद मॉनिटर करता हूं। इसका फायदा यह हुआ है कि सुदूर बैठे ग्रामीण भी बिना किसी डर के सीधे मुझ तक अपनी शिकायतें या अपराधियों के बारे में गोपनीय सूचनाएं पहुंचा रहे हैं।

Q| जिले का बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश की सीमा से जुड़ता है, किस तरह तालमेल बैठाते है?

जवाब: अंतरराज्यीय सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है। दो जिले है, दोनों के एसपी से मेरी रेगुलर बातचीत होती है और िजला पुलिस एक-दूसरे की मदद करती है। हमारे बीच खुफिया इनपुट का नियमित आदान-प्रदान होता है। जब भी कोई अपराधी सीमा पार भागने की कोशिश करता है या कोई संदिग्ध गतिविधि दिखती है, तो दोनों राज्यों की पुलिस आपसी तालमेल से तुरंत नाकेबंदी करती है। कई केस हमने सॉल्व किए। हमेशा त्वरित और पूरा सहयोग मिलता है।

Q| अपराध का ट्रेंड बदल रहा है। कोटा ग्रामीण में क्या बदलाव दिखे, कैसे सावधन रहे.?

जवाब: जैसे-जैसे डिजिटल साक्षरता बढ़ी है, अपराधियों ने भी अपने तौर-तरीके बदल लिए हैं। विशेष रूप से इटावा और आसपास के क्षेत्रों में साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के मामलों में वृद्धि हुई है। दूसरी ओर, क्षेत्र के तेजी से विकास और जमीनों की बढ़ती कीमतों के कारण भूमि विवाद, पारिवारिक रंजिश और घरेलू विवादों से जुड़े मामलों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। जमीन खरीदने के पहले पूरी पड़ताल करना एक समाधान है।

Q| पुलिसिंग में एआई की बहुत चर्चा है, क्या जिला स्तर पर ऐसे प्रयोग कर रहे है?

जवाब: केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित सीसीटीएनएस और नेटग्रिड जैसे सिस्टम इतने आधुनिक हो चुके हैं कि उनमें अपराधियों के डेटा का एनालिसिस करने के लिए इनबिल्ट एआई फीचर्स मौजूद हैं। किसी भी अपराधी के पुराने इतिहास, उसके छिपने के ठिकानों और उसके नेटवर्क को ट्रैक करने में बहुत मदद मिलती है। हमें जिला स्तर पर कोई अलग से नया टूल बनाने की जरूरत महसूस नहीं हुई।

Q| जिले से गुजरने वाले नए नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे ने क्या पुलिस की चुनौतियां बढ़ाई हैं?

जवाब: निश्चित रूप से। फ्री-फ्लो हाईवे और एक्सप्रेसवे ने आवाजाही को तेज किया है, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। तस्कर और संगठित अपराधी कम समय में एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंच जाते हैं। ऐसे में इन मार्गों पर प्रभावी निगरानी बनाए रखना और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाना बड़ी चुनौती है। प्रमुख हाईवे रूट्स पर आधुनिक चेकपॉइंट्स और नाके विकसित करने होंगे।

Q| यदि आप आईपीएस अधिकारी नहीं होते, तो खुद को किस भूमिका में देखते?

जवाब: भारतीय पुलिस सेवा में आने का मेरा उद्देश्य हमेशा देश सेवा रहा है। यदि मैं आईपीएस नहीं होता, तो संभवतः व्यवसाय के क्षेत्र में होता। मुझे हमेशा यह जानने में रुचि रही है कि विभिन्न बिजनेस मॉडल कैसे काम करते हैं, बाजार कैसे संचालित होता है और प्रबंधन के सिद्धांत व्यवहार में कैसे लागू होते हैं। इसलिए व्यापार और प्रबंधन का क्षेत्र मुझे हमेशा आकर्षित करता रहा है।

Q| 24 घंटे की तनावपूर्ण ड्यूटी के बीच खुद को कैसे फीट रखते हैं?

जवाब: पुलिस की नौकरी में मानसिक शांति और शारीरिक फिटनेस दोनों बहुत जरूरी हैं। मैं हफ्ते में जब भी समय मिले तीन से चार बार 5 किलोमीटर की रनिंग करता हूँ। दौड़ने से नई ऊर्जा आती है। इसके अलावा जब भी समय मिलता हैं, मैं खेलता हूँ। खेल कोई भी हो, हमें अनुशासन सिखाते हैं और तनाव दूर करते है।

Q| अब तक के करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण मामला कौन-सा रहा? क्या वो सोल्व हुआ और कैसे.?

जवाब: गंगापुर सिटी में मेरी पोस्टिंग के दौरान एक ब्लाइंड मर्डर हुआ था। मुस्लिम युवक द्वारा हिंदू युवक की गला रेत कर हत्या.. जरा-सी अफवाह कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर सकती थी। उदयपुर के कन्हैया लाल हत्याकांड के बाद प्रदेश का माहौल पहले से ही संवेदनशील था। सबसे बड़ी चुनौती अपराधियों को गिरफ्तार करने के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखना थी। हमारी टीम ने बेहद संयम और रणनीति के साथ काम किया। मीडिया, प्रशासन और समाज के सहयोग से अफवाहों पर नियंत्रण रखा गया तथा वैज्ञानिक जांच के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर मामले का सफल खुलासा किया।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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