इटावा। इटावा नगरपालिका में अध्यक्ष पद के बाद अब उपाध्यक्ष पद पर भी भाजपा ने जीत दर्ज कर ली है। मंगलवार को हुए उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी दीपक उपाध्याय ने 19 मत हासिल कर जीत दर्ज की। कांग्रेस समर्थित निर्दलीय पार्षद विनोद प्रजापति को 16 मत मिले। इस तरह दीपक उपाध्याय ने 3 मतों के अंतर से उपाध्यक्ष पद अपने नाम किया। इससे पहले नगरपालिका अध्यक्ष पद पर भी भाजपा की निर्मला नागर निर्वाचित हुई थीं। इस तरह अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पद भाजपा के खाते में गए हैं।
विकास और आमजन की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता : उपाध्याय
नवनिर्वाचित नगरपालिका उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय ने कहा कि पार्टी ने उन पर जो विश्वास जताया है, उस पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे। नगर का विकास और आमजन की समस्याओं का समाधान उनकी प्राथमिकता रहेगा। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को साथ लेकर नगर के विकास के लिए कार्य किया जाएगा।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने मनाया जीत का जश्न
दीपक उपाध्याय की जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने खुशी जताई। कार्यकर्ताओं ने पटाखे चलाए और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की बधाई दी। इस दौरान भाजपा देहात जिला अध्यक्ष प्रेमचंद गोचर, पूर्व मंत्री रामगोपाल बैरवा, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष रजनी सोनी, धर्मेंद्र आर्य, प्रदेश ओबीसी मोर्चा उपाध्यक्ष मुकेश कूदालिया, पूर्व प्रधान मानवेंद्र सिंह, इटावा मंडल अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह, जिला भाजपा प्रवक्ता रणजीत आर्य, पूर्व जिला उपाध्यक्ष रिंकू सोनी, पूर्व पार्षद महावीर नागर सहित नवनिर्वाचित पार्षद मौजूद रहे।
इसके बाद नवनिर्वाचित नगरपालिका अध्यक्ष निर्मला नागर और उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय कार्यकर्ताओं के साथ अंबेडकर सर्किल पहुंचे। यहां उन्होंने कार्यकर्ताओं का आभार जताया।
कांग्रेस ने निर्दलीय पार्षद पर लगाया दांव, फिर भी नहीं मिला अपेक्षित समर्थन
इटावा नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस की रणनीति को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा रही। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार नगरपालिका में भाजपा के 14, कांग्रेस के 16 और 5 निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए थे। इसके बावजूद भाजपा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर जीत दर्ज करने में सफल रही।
उपाध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस ने निर्दलीय पार्षद विनोद प्रजापति को अपना प्रत्याशी बनाया था। कांग्रेस के 16 पार्षदों के साथ निर्दलीय प्रत्याशी का समर्थन मिलने की स्थिति में 17 मत होने की संभावना थी, लेकिन विनोद प्रजापति को 16 मत ही मिले। इससे एक मत का अंतर सामने आया। इसी तरह अध्यक्ष पद के निर्वाचन में भी कांग्रेस प्रत्याशी को अपेक्षित संख्या से कम मत मिलने की बात सामने आई थी। ऐसे में दोनों चुनावों में सामने आए मतों के अंतर को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनी
तिक चर्चाएं तेज हैं।
